छत्तीसगढ़

साहित्य की खुशबू से महका पुरखौती मुक्तांगन : रायपुर लिटरेचर फेस्टिवल के समापन पर उमड़ा जनसैलाब

रायपुर। नवा रायपुर के शांत और सांस्कृतिक वातावरण से सजे पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित तीन दिवसीय ‘रायपुर साहित्य उत्सव-2026’ का भव्य समापन हुआ। आयोजन के अंतिम दिन भी पाठकों और साहित्य प्रेमियों का जोश कम नहीं हुआ। सुबह से ही परिसर में हर उम्र के लोगों की भारी भीड़ देखी गई, जो छत्तीसगढ़ में बढ़ते साहित्यिक रुझान का जीवंत प्रमाण है।

पंजीकरण के लिए लगी लंबी कतारें

उत्सव के तीसरे दिन भी युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में गहरा उत्साह नजर आया। स्थिति यह थी कि प्रवेश और पंजीकरण काउंटरों पर लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष पंजीकरण की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह स्पष्ट करता है कि डिजिटल युग में भी लोग अपनी जड़ों और किताबों से जुड़ने के लिए उत्सुक हैं।

विचार-मंथन का केंद्र बने विभिन्न सत्र

तीन दिनों तक चले इस समागम में केवल कविताओं और कहानियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विविध विषयों पर गंभीर चर्चाएं हुईं:

कला और संस्कृति: छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कलाओं का आधुनिक संदर्भ।

मीडिया और तकनीक: बदलती दुनिया में साहित्य और एआई (AI) की भूमिका।

सामाजिक सरोकार: समाज के विकास में लेखकों का उत्तरदायित्व।

देशभर से आए प्रख्यात विद्वानों और वक्ताओं ने अपने अनुभवों को साझा किया, जिससे वहां मौजूद शोधार्थियों और छात्रों को नया दृष्टिकोण मिला।

सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम

‘रायपुर साहित्य उत्सव’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पहचान दिलाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। पुरखौती मुक्तांगन की खुली फिजाओं में लेखकों और जनता के बीच सीधा संवाद हुआ, जिसने इस उत्सव को एक सामूहिक उत्सव का रूप दे दिया।

“यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ की जनता साहित्य और कला के प्रति बेहद संवेदनशील और जागरूक है।”

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