बस्तर में लोकतंत्र की नई सुबह : 47 गांवों में दशकों बाद पहली बार फहराया जाएगा तिरंगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों से एक ऐतिहासिक और गौरवशाली खबर सामने आई है। इस वर्ष का गणतंत्र दिवस बस्तर संभाग के उन 47 गांवों के लिए खुशियों की नई सौगात लेकर आया है, जहाँ आजादी के इतने वर्षों बाद भी पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से लहराएगा।
नक्सलवाद के खात्मे की ओर बढ़ते कदम
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की है। इस लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, यह बदलाव सुरक्षा और विकास की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। बस्तर के ये गांव दशकों से हिंसा और डर के साये में जीने को मजबूर थे, लेकिन अब यहाँ की हवाओं में देशभक्ति का गुंजाल सुनाई देगा।
इन जिलों के गांवों में होगा उत्सव
पहली बार गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाने वाले ये 47 गांव मुख्य रूप से तीन जिलों में स्थित हैं:
बीजापुर
नारायणपुर
सुकमा
इन क्षेत्रों में पहले कभी भी किसी राष्ट्रीय पर्व पर कोई आधिकारिक आयोजन या ध्वजारोहण नहीं हुआ था। यह पहली बार है जब यहाँ के ग्रामीण मुख्यधारा से जुड़कर अपनी आजादी और लोकतंत्र का जश्न मनाएंगे।
शांति और विकास की जीत
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इन गांवों में तिरंगा फहराना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि शांति, लोकतंत्र और विकास के प्रति हमारे संकल्प की जीत है।
बदलाव के मुख्य कारण:
सुरक्षा बलों की तैनाती: इन दुर्गम क्षेत्रों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है।
सरकारी योजनाओं की पहुँच: कैंपों के माध्यम से सरकार अब सीधे ग्रामीणों तक विकास योजनाएं पहुँचा रही है।
जनता का उत्साह: बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी में तिरंगा फहराने को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
यह ऐतिहासिक पल छत्तीसगढ़ के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहाँ डर की जगह अब विकास और राष्ट्रवाद ले रहा है।
















