मानवता और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की सार्थकता : राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर। रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह हाल ही में संपन्न हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस गरिमामयी समारोह में कुल 1448 छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियाँ प्रदान की गईं।
उपलब्धियों का उत्सव और मानद सम्मान
समारोह के दौरान राज्यपाल ने शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करते हुए 19 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और 53 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि से नवाजा। इसके अतिरिक्त, समाज और कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली तीन विभूतियों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई:
पद्मश्री फूलबासन बाई यादव (सामाजिक कार्यकर्ता)
श्री रामेश्वर वैष्णव (प्रसिद्ध लेखक एवं गीतकार)
श्री विजय मिश्रा (प्रसिद्ध नाट्य कलाकार)
राज्यपाल का संदेश: “सफलता से बड़ा है संतोष”
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने जीवन के गूढ़ मंत्र साझा किए। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
ज्ञान का सामाजिक उत्तरदायित्व: उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज का कल्याण होना चाहिए।
इंटरनेट और चिंतन की शक्ति: आज के डिजिटल युग का जिक्र करते हुए उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन के विचारों को उद्धृत किया—”शिक्षा तथ्यों को रटना नहीं, बल्कि मस्तिष्क को सोचने के लिए प्रशिक्षित करना है।”
संतोष ही असली खुशी: राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सफलता का अर्थ केवल भौतिक उपलब्धियाँ नहीं हैं। मन की शांति और संतोष ही जीवन में वास्तविक प्रसन्नता लाते हैं।
प्रकृति के साथ तालमेल: उन्होंने सतत विकास पर बल देते हुए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ लगाने की अपील की और कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन ही हमारे अस्तित्व की नींव है।
राष्ट्र के निर्माता हैं विश्वविद्यालय
श्री डेका ने रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे देश के चरित्र और अंतरात्मा को गढ़ने वाले संस्थान हैं। उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि उनका योगदान भारत को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
समारोह की अन्य झलकियाँ
इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी अपने विचार रखे और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री रविशंकर जी महाराज, कुलपति डॉ. सौरभ चतुर्वेदी और कुलसचिव डॉ. कमल कुमार प्रधान सहित कई गणमान्य नागरिक और अभिभावक इस गौरवशाली पल के साक्षी बने।
















