तेंदूपत्ता व्यापार में टीसीएस कटौती, वनांचल की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया विस्तार : मंत्री केदार कश्यप

रायपुर। केंद्र सरकार के हालिया बजट में तेंदूपत्ता उद्योग के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की गई है। सरकार ने तेंदूपत्ता व्यापार पर लागू टीसीएस (Tax Collected at Source) की दर को 5% से घटाकर अब केवल 2% कर दिया है। इस निर्णय का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इसे ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था के लिए “संजीवनी” बताया है।
इस निर्णय के मुख्य लाभ और प्रभाव
इस कटौती से न केवल व्यापार सुगम होगा, बल्कि सीधे तौर पर लाखों संग्राहकों की जेब में अधिक पैसा आएगा। इस बदलाव के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
बढ़ती कार्यशील पूंजी: टैक्स की दर कम होने से व्यापारियों और सहकारी समितियों के पास अधिक नगदी उपलब्ध रहेगी, जिससे व्यापारिक संचालन बेहतर होगा।
संग्राहकों को सीधा फायदा: कर कटौती का सकारात्मक असर सीधे उन आदिवासी और वनवासी परिवारों पर पड़ेगा जो अपनी आजीविका के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण पर निर्भर हैं। उन्हें उनके कठिन परिश्रम का अधिक मूल्य मिल सकेगा।
जटिल प्रक्रियाओं से राहत: पहले कई छोटे संग्राहक और व्यापारी आयकर के दायरे में नहीं होने के बावजूद 5% टीसीएस देते थे, जिसे वापस पाने (रिफंड) की प्रक्रिया बहुत कठिन थी। अब कम दर होने से यह समस्या काफी हद तक सुलझ जाएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती: यह कदम वनांचल क्षेत्रों में स्वरोजगार और व्यापार को प्रोत्साहित करेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक स्थिरता आएगी।
संवेदनशील निर्णय के लिए आभार
मंत्री श्री केदार कश्यप ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रमाणित करता है कि केंद्र सरकार वन आश्रित समुदायों और श्रम आधारित उद्योगों की आर्थिक सुरक्षा के प्रति पूरी तरह गंभीर है। उनके अनुसार, यह बजट केवल राजस्व केंद्रित न होकर समावेशी विकास और गरीब कल्याण की सोच पर आधारित है।
















