छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला : आंदोलनों के दौरान दर्ज ‘राजनीतिक द्वेष’ वाले मुकदमे होंगे वापस

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने पिछले शासनकाल के दौरान विभिन्न आंदोलनों के मद्देनजर दर्ज किए गए प्रकरणों को वापस लेने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय (महानदी भवन) में उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री श्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के मुख्य बिंदु और निर्णय
उपसमिति ने उन मुकदमों की समीक्षा की जो पूर्ववर्ती सरकार के समय राजनीतिक, सामाजिक और कर्मचारी संगठनों के आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए थे। बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:
प्रकरणों का वर्गीकरण: राजज्ञा उल्लंघन, लोक सेवक के कार्य में बाधा डालने और अन्य धाराओं के तहत दर्ज मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
अनुशंसा: समिति ने कई महत्वपूर्ण प्रकरणों को अंतिम स्वीकृति के लिए मंत्रिपरिषद (Cabinet) के पास भेजने का निर्णय लिया है।
सतत निगरानी: गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि पूर्व में अनुशंसित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
इस बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
“मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं” – विजय शर्मा
बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि राजनीति में विरोध का अपना स्थान है और इसका सम्मान होना चाहिए। उनके वक्तव्य के मुख्य अंश:
“राजनीति मतभेद का विषय है, मनभेद का नहीं। पिछली सरकार ने द्वेषपूर्ण मानसिकता के साथ कार्यकर्ताओं और संगठनों पर मुकदमे लादे थे। हमारी सरकार इन सभी मामलों की समीक्षा कर रही है ताकि जनता को अनावश्यक अदालती कार्यवाही से राहत मिल सके।”
इन वर्गों को मिलेगी राहत:
राजनीतिक कार्यकर्ता: विभिन्न दलों के कार्यकर्ता जिन्हें आंदोलनों के कारण निशाना बनाया गया।
सामाजिक और गैर-राजनीतिक संगठन: वे संस्थाएं जिन्होंने जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाई।
कर्मचारी संगठन: अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए इन मामलों को वापस लेगी। इसका मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित करना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार न होना पड़े।
















