छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का नया उदय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन की बदलती तस्वीर

रायपुर। छत्तीसगढ़ आज केवल एक राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण सशक्तिकरण और पारदर्शी प्रशासन के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ने नीतियों को दफ्तरों से निकालकर सीधे आम जनता की चौखट तक पहुँचाया है। “सुशासन” यहाँ केवल एक नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की नई कार्यशैली बन चुका है।

  1. आवास से आत्मसम्मान: घर भी, रोजगार भी

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने एक मिसाल पेश की है। बीते दो वर्षों में 8 लाख से अधिक पक्के घरों का निर्माण पूरा कर राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है।

लखपति दीदी: यह योजना केवल छत देने तक सीमित नहीं रही। निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले सामान की आपूर्ति कर 8 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र किया गया है।

अंतिम छोर तक पहुंच: विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) के लिए ‘पीएम-जनमन’ के तहत 33 हजार आवासों की स्वीकृति एक ऐतिहासिक कदम है।

  1. विश्वास और विकास: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का कायाकल्प

बस्तर और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में साय सरकार की रणनीति “सुरक्षा, विकास और विश्वास” के त्रिकोण पर आधारित है।

मुख्यधारा से जुड़ाव: आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों को न केवल 3,400 से अधिक आवास दिए गए, बल्कि ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के जरिए उन्हें राजमिस्त्री जैसे कौशल सिखाकर सम्मानजनक रोजगार से जोड़ा गया है।

सड़कों का जाल: ‘पीएम जनमन’ के तहत दुर्गम इलाकों में लगभग 2,902 किमी सड़कों की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 1,064 किमी का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है।

  1. महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ अब यहाँ की महिलाएँ हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से लगभग 30 लाख महिलाएँ स्व-सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं।

पहल,उद्देश्य/परिणाम

लखपति दीदी अभियान,4.94 लाख महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया।
छत्तीसकला ब्रांड,ग्रामीण उत्पादों को वैश्विक पहचान और बाज़ार दिलाना।
दीदी के गोठ,रेडियो के माध्यम से महिलाओं की सफलता की कहानियों का प्रचार।

  1. जल संरक्षण और डिजिटल पारदर्शिता

‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के माध्यम से राज्य ने जल संकट के समाधान की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं।

नरेगा का सुदृढ़ीकरण: दो वर्षों में 20 करोड़ से अधिक मानव दिवसों का सृजन कर ग्रामीणों को उनके घर के पास ही काम उपलब्ध कराया गया।

डिजिटल गवर्नेंस: ‘युक्तधारा’ पोर्टल और पंचायत स्तर पर क्यूआर कोड जैसी सुविधाओं ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है और आम नागरिक को विकास कार्यों की सीधी निगरानी की शक्ति दी है।

निष्कर्ष: समावेशी विकास का संकल्प

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का दृष्टिकोण स्पष्ट है—शासन वह है जो व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाए। आवास, पानी, सड़क और आजीविका के इन समन्वित प्रयासों ने छत्तीसगढ़ को एक “आत्मनिर्भर मॉडल” में बदल दिया है। आज छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा समावेशी है, जहाँ हर वर्ग और हर क्षेत्र की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा रही है।

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