छत्तीसगढ़

जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला माना जाता था, आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा है : प्रधानमंत्री मोदी

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने संबोधन के दौरान बस्तर के बदलते स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र को कभी केवल ‘पिछड़ा’ या ‘आकांक्षी जिला’ माना जाता था, आज वह ‘बस्तर ओलंपिक’ के माध्यम से अपनी नई वैश्विक पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विकास की लहर अब बस्तर के दूरस्थ गांवों तक पहुँच चुकी है, जहाँ पहली बार बस सेवाएं शुरू होने पर ग्रामीणों ने इसे एक उत्सव की तरह मनाया।

विकास की नई नीति और सकारात्मक बदलाव

प्रधानमंत्री ने अतीत की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि पूर्व में कई जिलों को विकास की दौड़ में पीछे छोड़ दिया गया था, जिससे वहां की जनता बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रह गई थी। उन्होंने बताया कि पहले ऐसे क्षेत्रों को ‘पनिशमेंट पोस्टिंग’ का केंद्र माना जाता था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस सोच को बदला है। अब इन क्षेत्रों में ऊर्जावान और योग्य युवा अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, जो तीन वर्षों के कार्यकाल में स्वतंत्र रूप से जमीनी बदलाव ला रहे हैं।

बस्तर: प्रकृति का स्वर्ग और पर्यटन का केंद्र

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बस्तर को ‘छत्तीसगढ़ का सौभाग्य’ और ‘धरती का स्वर्ग’ बताया। उन्होंने क्षेत्र की विशेषताओं को रेखांकित किया:

प्राकृतिक संपदा: कुटुमसर की गुफाएं और मंत्रमुग्ध कर देने वाले जलप्रपात।

वैश्विक पहचान: धुरमारास गांव को विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया जाना।

अबूझमाड़ के जंगल: विशाल और समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक।

नक्सलवाद पर प्रहार और खेल-संस्कृति का उदय

मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद की छाया में रहने वाला यह विशाल भू-भाग (जो केरल से भी बड़ा है) अब शांति की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षाबलों के साहस से नक्सलवाद अंतिम दौर में है।

बस्तर ओलंपिक की बढ़ती लोकप्रियता: | वर्ष | युवाओं की भागीदारी | | :— | :— | | पिछला वर्ष | 1.65 करोड़ | | वर्तमान वर्ष | 3.91 करोड़ |

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि संभाग स्तरीय ‘बस्तर पंडुम’ का शुभारंभ 7 तारीख को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा किया जाएगा, जबकि 9 तारीख को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसके समापन समारोह में शामिल होंगे।

“बस्तर अब भय का नहीं, बल्कि विश्वास और असीमित संभावनाओं का प्रतीक है। सही नेतृत्व और नेक नीयत से दशकों की उपेक्षा को विकास में बदला जा सकता है।” – विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

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