RBI की नई रणनीति : अब सोने-चांदी की कीमतों पर भी रहेगी पैनी नजर

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में कई महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लिए गए। जहाँ एक ओर रेपो रेट को स्थिर रखकर आम आदमी को लोन की ईएमआई (EMI) के मोर्चे पर राहत दी गई, वहीं दूसरी ओर महंगाई के आकलन के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया गया है।
महंगाई मापने के दायरे में शामिल हुए कीमती धातु
अब तक आरबीआई मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों (जैसे प्याज, टमाटर) और ईंधन के आधार पर महंगाई का आकलन करता था। लेकिन अब केंद्रीय बैंक ने सोने और चांदी की कीमतों को भी ‘महंगाई निगरानी ढांचे’ में शामिल करने का फैसला किया है।
इस कदम के पीछे के मुख्य कारण:
सटीक आकलन: वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और घरेलू मांग के कारण सोने-चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इन्हें शामिल करने से अर्थव्यवस्था पर महंगाई के दबाव का अधिक सटीक डेटा मिल सकेगा।
उपभोक्ता व्यवहार: भारतीय समाज में सोने-चांदी की भारी खपत को देखते हुए इनका मूल्यांकन जरूरी हो गया था।
कीमतों पर असर: विशेषज्ञों का मानना है कि इस निगरानी से कीमतों में सीधे तौर पर कमी नहीं आएगी, लेकिन सरकार को बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
क्या कहते हैं महंगाई के आंकड़े?
दिसंबर के डेटा के अनुसार, यदि सोने और चांदी को हटा दिया जाए, तो मूल महंगाई दर (Core Inflation) 2.6% पर स्थिर है। यह दर्शाता है कि खाद्य और ईंधन के मोर्चे पर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। हालांकि, आरबीआई ने सचेत किया है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और मौसम में बदलाव आने वाले समय में चुनौती खड़ी कर सकते हैं।
वर्तमान बाजार की स्थिति
वैश्विक अस्थिरता और कमजोर डॉलर के कारण पिछले एक साल में कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी देखी गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार:
सोना: एमसीएक्स (MCX) पर इसकी कीमतें बढ़कर 1.53 लाख रुपये के स्तर तक पहुंच गई हैं।
चांदी: कीमतों में कुछ गिरावट देखी गई और यह 2.40 लाख रुपये के आसपास कारोबार कर रही है।
मुख्य बिंदु जो आपको जानने चाहिए:
रेपो रेट: कोई बदलाव नहीं (लोन महंगे नहीं होंगे)।
MSME लोन: सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए ऋण सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई।
सतर्कता: 2025-26 के अंत तक वैश्विक कारकों के चलते महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।
















