हड्डियों की ‘कड़कड़ाहट’ : सामान्य संकेत या किसी बीमारी की आहट?

नई दिल्ली (एजेंसी)। उठते-बैठते या चलते समय जोड़ों से ‘चटक’ या ‘कट-कट’ की आवाज़ आना आजकल एक आम समस्या बन गई है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे क्रेपिटस (Crepitus) कहा जाता है। हालांकि यह हमेशा चिंता का विषय नहीं होता, लेकिन इसके पीछे के कारणों को समझना स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी है।
क्यों आती है जोड़ों से आवाज़?
जोड़ों के बीच एक लुब्रिकेंट (साइनोवियल फ्लूइड) होता है, जिसमें हवा के छोटे बुलबुले बन जाते हैं। जब हम हिलते-डुलते हैं, तो ये बुलबुले फूटते हैं, जिससे चटकने की आवाज़ आती है। लेकिन, इसके अन्य गंभीर कारण भी हो सकते हैं:
कार्टिलेज का घिसना: हड्डियों के सिरों पर मौजूद लचीले ऊतक (कार्टिलेज) जब उम्र या अन्य कारणों से कम होने लगते हैं, तो हड्डियाँ आपस में रगड़ खाने लगती हैं।
गठिया (Arthritis) का शुरुआती लक्षण: यह स्थिति ऑस्टियोआर्थराइटिस का संकेत हो सकती है, जहाँ घुटनों के जोड़ों की चिकनाई खत्म होने लगती है।
मांसपेशियों में खिंचाव: कभी-कभी मांसपेशियों के अत्यधिक तनाव या चोट के कारण भी हड्डियाँ आवाज़ करती हैं।
महत्वपूर्ण नोट: यदि जोड़ों से आवाज़ आने के साथ-साथ दर्द, सूजन या जकड़न महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।
हड्डियों को मज़बूत बनाने के प्रभावी उपाय
हड्डियों की कमज़ोरी और कैल्शियम की कमी को दूर करने के लिए आप अपनी जीवनशैली में निम्नलिखित बदलाव कर सकते हैं:
- खान-पान में सुधार (डाइट)
कैल्शियम और प्रोटीन: रात को हल्दी वाला दूध पिएं। साथ ही गुड़ और भुने चने का सेवन हड्डियों की मज़बूती के लिए रामबाण माना जाता है।
सूखे मेवे: बादाम में पोटैशियम होता है जो शरीर से कैल्शियम के नुकसान को रोकता है। अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड हड्डियों के पुनर्निर्माण में मदद करता है।
विटामिन C: कार्टिलेज के निर्माण के लिए विटामिन C अनिवार्य है। अपनी डाइट में संतरा, नींबू, ब्रोकली और पालक जैसी चीज़ों को शामिल करें।
- नियमित व्यायाम
हल्की तीव्रता वाले व्यायाम (Low-intensity exercises) जोड़ों की फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाते हैं। अगर चलने-फिरने में ज़्यादा दिक्कत हो, तो फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह पर ही व्यायाम शुरू करें।
- पर्याप्त विश्राम
शरीर की मरम्मत (Repairing) के लिए गहरी नींद बहुत ज़रूरी है। प्रतिदिन कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें ताकि आपकी मांसपेशियों और जोड़ों को रिकवर होने का समय मिल सके।
















