भारत-रूस तेल व्यापार : अमेरिकी टैरिफ के बीच रणनीति में बदलाव

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका द्वारा हाल ही में दंडात्मक टैरिफ हटाए जाने के बाद, भारत अब रूस से कच्चे तेल के आयात को चरणबद्ध तरीके से कम करने की योजना बना रहा है। हालांकि, तकनीकी बाधाओं और मौजूदा अनुबंधों के कारण यह बदलाव तुरंत संभव नहीं है, लेकिन आने वाले हफ्तों में रूसी तेल की खेप में गिरावट देखी जा सकती है।
आयात कम करने की अनौपचारिक कवायद
सूत्रों के अनुसार, तेल रिफाइनरियों को रूस से तेल न खरीदने का कोई लिखित आदेश तो नहीं मिला है, लेकिन अनौपचारिक रूप से आयात घटाने के संकेत दिए गए हैं। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
पुराने ऑर्डर्स का सम्मान: रिफाइनरियाँ उन सौदों को पूरा करेंगी जो 6-8 सप्ताह पहले किए जा चुके हैं।
नए अनुबंधों पर रोक: भविष्य के लिए रूस से नए ऑर्डर देने से बचने की सलाह दी गई है।
अपवाद: नायरा एनर्जी जैसी रिफाइनरियाँ, जिनके पास आपूर्ति के सीमित विकल्प हैं, फिलहाल आयात जारी रख सकती हैं।
रिफाइनरियों का रुख और भविष्य की योजना
पिछले एक साल में अमेरिका द्वारा रूसी निर्यातकों पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और मंगलोर रिफाइनरी (MRPL) जैसी कंपनियों ने पहले ही दूरी बना ली थी। अब देश की दिग्गज कंपनियाँ—इंडियन ऑयल (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL)—भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
देश की सबसे बड़ी खरीदार, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अगले कुछ हफ्तों में अपनी अंतिम खेप (लगभग 1.5 लाख बैरल) प्राप्त करने के बाद रूसी तेल का आयात बंद कर सकती है। हालांकि इस संवेदनशील विषय पर पेट्रोलियम, वाणिज्य और विदेश मंत्रालयों ने आधिकारिक तौर पर कोई भी टिप्पणी करने से परहेज किया है।
अमेरिकी शर्त: टैरिफ और व्यापार का गणित
अमेरिकी प्रशासन ने भारत के सामने एक स्पष्ट विकल्प रखा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के अनुसार, यदि भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता खत्म करता है, तो भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी आयात शुल्क 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा।
चेतावनी: अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भारत भविष्य में दोबारा रूसी तेल का आयात शुरू करता है, तो उस पर फिर से 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।
















