छत्तीसगढ़

“छत्तीसगढ़ का विकास अब थमेगा नहीं, आने वाले 25 वर्षों में यह राज्य दोगुनी रफ्तार से प्रगति करेगा।” : अमित शाह

रायपुर। रायपुर में आयोजित ‘ऑर्गनाइजर’ के कॉन्क्लेव में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की विकास यात्रा और भविष्य के लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने राज्य के गठन से लेकर माओवाद की चुनौतियों तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी बात रखी।

माओवाद पर कड़ा प्रहार और नई समयसीमा

अमित शाह ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली बघेल सरकार के दौरान माओवादी आतंकवाद को संरक्षण मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक लोकतंत्र में हथियारों के बल पर सत्ता हासिल करने की विचारधारा के लिए कोई स्थान नहीं है।

लक्ष्य 2026: गृह मंत्री ने घोषणा की कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से 31 मार्च 2026 तक भारत को माओवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा।

आत्मसमर्पण की अपील: उन्होंने आदिवासी युवाओं से मुख्यधारा में लौटने का आह्वान करते हुए कहा कि हथियार डालने वालों का स्वागत ‘रेड कारपेट’ से किया जाएगा, क्योंकि सरकार बल प्रयोग के बजाय शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देती है।

विकास के आंकड़ों में छत्तीसगढ़ की छलांग

शाह ने पिछले ढाई दशकों के आर्थिक और सामाजिक सुधारों का तुलनात्मक विवरण पेश किया:

सूचकांक,प्रगति का स्तर

वार्षिक बजट,25 वर्षों में 30 गुना की वृद्धि
जीएसडीपी (GSDP),लगभग 25 गुना इजाफा
प्रति व्यक्ति आय,17 गुना तक बढ़ी
साक्षरता दर,65% से बढ़कर 80% हुई

स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार:

मेडिकल कॉलेजों की संख्या 1 से बढ़कर 16 हो गई है।

शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है (शिशु मृत्यु दर 79 से घटकर 37 पर आई)।

सिंचाई क्षमता में दोगुनी और रबी फसलों के उत्पादन में 6 गुना वृद्धि हुई है।

छोटे राज्यों की संकल्पना और सुशासन

अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विजन को याद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड का निर्माण केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि जन-आकांक्षाओं का सम्मान था।

उन्होंने कांग्रेस और भाजपा की कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा कि जहाँ आंध्र-तेलंगाना विभाजन विवादों और कटुता से भरा रहा, वहीं अटल जी द्वारा बनाए गए राज्य आज एक-दूसरे के पूरक बनकर देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ अब ‘बीमारू’ राज्य की श्रेणी से बाहर निकलकर ‘विकसित भारत @2047’ का एक प्रमुख आधार स्तंभ और शुभंकर (Mascot) बनने जा रहा है।

आदिवासी कल्याण में अग्रणी

गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ आज देश में आदिवासी कल्याण के मामले में रोल मॉडल है। राज्य में एकलव्य आवासीय विद्यालयों की संख्या शून्य से बढ़कर 75 हो गई है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिल रहे हैं।

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