अडानी समूह पर अमेरिकी जांच का साया : ईरान से एलपीजी आयात मामले में OFAC ने मांगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली (एजेंसी)। गौतम अडानी के नेतृत्व वाली प्रमुख कंपनी, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL), एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जांच के दायरे में है। अमेरिकी वित्त विभाग की इकाई, विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने कंपनी से ईरान के साथ हुए कथित व्यापारिक लेन-देन को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है।
क्या है पूरा मामला?
अडानी एंटरप्राइजेज ने आधिकारिक तौर पर शेयर बाजार को सूचित किया है कि उन्हें 4 फरवरी को अमेरिकी एजेंसी से एक नोटिस प्राप्त हुआ है। यह जांच मुख्य रूप से उन आरोपों पर आधारित है जिनमें कहा गया था कि समूह ने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों (विशेषकर LPG) का आयात किया है।
आधार: यह जांच जून 2025 में ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में छपी एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है।
आरोप: रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अडानी समूह ने कथित तौर पर समुद्री रास्तों का इस्तेमाल कर भारत में ईरानी गैस पहुंचाई थी।
कंपनी का रुख: अडानी समूह ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी अधिकारियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं। कंपनी ने यह भी जोर देकर कहा कि इस नोटिस का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन किया है।
आरोपों पर अडानी समूह की सफाई
अडानी समूह ने पहले भी इन दावों को पूरी तरह से निराधार बताया था। समूह की आधिकारिक नीति के अनुसार:
उनके मुंद्रा पोर्ट या किसी भी अन्य टर्मिनल पर ईरानी सामान की आवाजाही प्रतिबंधित है।
ईरानी झंडे वाले जहाजों या ईरानी मालिकों वाले जहाजों को उनके बंदरगाहों पर कोई सुविधा नहीं दी जाती है।
कंपनी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करने का दावा करती है।
विशेष नोट: वर्तमान में यह एक ‘गैर-आपराधिक जांच’ (Non-criminal investigation) है, जिसका उद्देश्य केवल सूचनाएं एकत्र करना और तथ्यों की पुष्टि करना है।
















