भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते की तैयारी : रूसी तेल और टैरिफ पर बनी सहमति

नई दिल्ली (एजेंसी)। वॉशिंगटन से आई ताजा रिपोर्टों के अनुसार, बाइडन प्रशासन के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप सरकार भारत के साथ एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक आधिकारिक ‘फैक्ट शीट’ के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों में दोनों देश वाणिज्यिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
रूसी तेल और टैरिफ में बड़ी राहत
इस डील का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक हिस्सा रूस के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं। समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
रूसी तेल पर प्रतिबद्धता: भारत ने रूस से तेल खरीद को चरणबद्ध तरीके से कम करने या बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।
अतिरिक्त टैरिफ की समाप्ति: भारत के इस कदम के बदले राष्ट्रपति ट्रंप भारतीय आयात पर लगने वाले 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने पर सहमत हो गए हैं। इसके लिए जरूरी कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं।
पारस्परिक शुल्क में कटौती: अमेरिका ने भारत के लिए ‘म्युचुअल टैरिफ’ को 25% से घटाकर 18% करने का निर्णय लिया है।
अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुलेगा भारतीय बाजार
यह समझौता भारत की 140 करोड़ की आबादी वाले विशाल बाजार को अमेरिकी निर्यातकों के लिए सुलभ बनाएगा।
जीरो टैरिफ का लाभ: भारत अब अमेरिका से आने वाले औद्योगिक सामानों, सूखे अनाज, सोयाबीन तेल, और मेवों जैसे उत्पादों पर या तो टैक्स पूरी तरह खत्म कर देगा या काफी कम कर देगा।
अन्य उत्पाद: ताजे फल, शराब (Spirits) और दालों के आयात पर भी शुल्क में बड़ी कटौती की उम्मीद है।
डिजिटल सर्विस टैक्स: भारत ने अपने डिजिटल सेवा करों (Digital Service Tax) को हटाने पर भी सहमति व्यक्त की है, जिससे अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
भविष्य की चुनौतियां और बातचीत
हालांकि कई बाधाएं दूर हो गई हैं, लेकिन भविष्य में कुछ तकनीकी और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी:
“दोनों राष्ट्र श्रम मानकों, बौद्धिक संपदा (IP), पर्यावरण संरक्षण और सरकारी खरीद जैसे जटिल विषयों पर एक साझा रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम करना जारी रखेंगे।”
प्रमुख क्षेत्र,वर्तमान स्थिति
डिजिटल टैक्स,हटाने पर सहमति
औद्योगिक सामान,टैरिफ में भारी कटौती
विवाद समाधान,द्विपक्षीय बातचीत जारी
यह समझौता न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि भू-राजनीतिक (Geopolitical) रूप से भी दक्षिण एशिया में एक नया समीकरण पैदा करेगा।
















