लिवर को संजीवनी देने वाली 3 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। लिवर हमारे शरीर का वह ‘फ़िल्टर’ है जो खून से गंदगी साफ करने और पाचन को दुरुस्त रखने का काम करता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खान-पान का सबसे बुरा असर इसी अंग पर पड़ता है।
अगर आप भी अपने लिवर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स और मजबूत करना चाहते हैं, तो आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा भावसार ने तीन ऐसी चमत्कारी जड़ी-बूटियों का सुझाव दिया है जो लिवर के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
- पुनर्नवा (Punarnava)
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है—’पुनः नवा’ यानी जो शरीर को फिर से नया बना दे। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो लिवर की सूजन कम करने में सहायक हैं।
फायदे: यह लिवर की कोशिकाओं से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है और भूख बढ़ाने में मदद करता है।
सेवन का तरीका: इसका काढ़ा बनाना सबसे बेहतर है। 1 चम्मच (लगभग 10 ग्राम) पुनर्नवा पाउडर को 2 कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो उसे छानकर पी लें।
- भूमि-आमलकी (Bhumi-Amla)
यह छोटी सी दिखने वाली बूटी लिवर के लिए बेहद शक्तिशाली है। यह लिवर को बाहरी प्रदूषण और हानिकारक तत्वों से बचाने के लिए एक ढाल की तरह काम करती है।
फायदे: यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाती है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) को मजबूत करती है।
सेवन का तरीका: आधा चम्मच पाउडर सुबह खाली पेट या खाना खाने के 2 घंटे बाद गुनगुने पानी के साथ लें।
- भृंगराज (Bhringraj)
ज्यादातर लोग भृंगराज को सिर्फ बालों के लिए अच्छा मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे एक बेहतरीन ‘लिवर टॉनिक’ भी कहा गया है।
फायदे: यह फैटी लिवर और पीलिया (Jaundice) जैसी समस्याओं में बहुत असरदार है। यह शरीर में पित्त के प्रवाह को संतुलित रखता है।
सेवन का तरीका: एक चौथाई से आधा चम्मच पाउडर दिन में दो बार (खाना खाने से पहले या बाद में) गर्म पानी के साथ लिया जा सकता है।
विशेष नोट: हालांकि ये जड़ी-बूटियां पूरी तरह प्राकृतिक हैं, फिर भी इन्हें शुरू करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
















