छत्तीसगढ़

महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति के लिए 6 जिले के 42 स्व-सहायता समूह को रेडी-टू-ईट निर्माण व वितरण का कार्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से कुपोषण को जड़ से मिटाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में, अब आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए ‘रेडी-टू-ईट’ (Ready-to-Eat) पौष्टिक आहार बनाने और वितरण की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को दी जा रही है।

पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत

राज्य के छह जिलों में इस योजना को एक प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में शुरू किया गया है। इसके तहत 42 महिला स्व-सहायता समूहों को इस महत्वपूर्ण कार्य से जोड़ा गया है।

योजना के तहत शामिल जिले और समूहों का विवरण:

जिला,समूहों की संख्या

कोरबा,10 समूह
रायगढ़,10 समूह
सूरजपुर,07 समूह
बलौदाबाजार-भाठापारा,07 समूह
बस्तर,06 समूह
दंतेवाड़ा,02 समूह

मुख्य उपलब्धियां और उद्देश्य

रायगढ़ बना अग्रणी: रायगढ़ प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जहां महिला समूहों ने आधिकारिक तौर पर ‘रेडी-टू-ईट’ का उत्पादन शुरू कर दिया है।

आर्थिक सशक्तिकरण: महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के अनुसार, इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को सीधा रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे सामाजिक रूप से अधिक सशक्त होंगी।

बेहतर स्वास्थ्य: इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को ताजा और उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक आहार सुनिश्चित करना है, जिससे प्रदेश के पोषण स्तर में सुधार आ सके।

सरकार की यह रणनीति न केवल बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर रही है, बल्कि “सशक्त नारी, सशक्त छत्तीसगढ़” के संकल्प को भी धरातल पर उतार रही है।

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