क्रेडिट कार्ड के नए नियम : 1 अप्रैल से बदल सकती है आपकी खर्च करने की आदत

न्युज डेस्क (एजेंसी)। भारत में डिजिटल क्रांति के साथ ही क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल छोटे शहरों तक भी पहुँच चुका है। इसी बदलाव को देखते हुए, आयकर विभाग 1 अप्रैल, 2026 से नए नियमों को लागू करने की तैयारी में है। ये बदलाव मुख्य रूप से ‘ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026’ के तहत प्रस्तावित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना है।
यहाँ उन 5 प्रमुख बदलावों का विवरण है जो आपकी जेब और टैक्स पर असर डालेंगे:
- आयकर विभाग की रहेगी बड़े खर्चों पर नज़र
नए प्रावधानों के अनुसार, अब क्रेडिट कार्ड बिल के भारी भुगतान की जानकारी सीधे आयकर विभाग तक पहुँचेगी:
कैश पेमेंट: यदि आप एक साल में 1 लाख रुपये या उससे अधिक का बिल नकद (Cash) में जमा करते हैं, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।
डिजिटल पेमेंट: यदि UPI या नेट बैंकिंग के जरिए सालाना 10 लाख रुपये से अधिक का बिल चुकाया जाता है, तो बैंक इसकी सूचना विभाग को देगा।
- बिना PAN नहीं मिलेगा नया कार्ड
पारदर्शिता को और सख्त बनाने के लिए अब किसी भी वित्तीय संस्थान या बैंक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे क्रेडिट कार्ड जारी करने से पहले आवेदक का स्थायी खाता संख्या (PAN) प्राप्त करें। बिना पैन कार्ड के अब नया कार्ड बनवाना संभव नहीं होगा।
- कंपनी द्वारा दिए गए कार्ड पर टैक्स का पेंच
यदि आपकी कंपनी आपको क्रेडिट कार्ड देती है और उसके वार्षिक शुल्क या सदस्यता फीस का भुगतान करती है, तो इसे आपकी आय का हिस्सा (Perquisite) माना जाएगा और इस पर टैक्स लगेगा। हालांकि, यदि आप यह सिद्ध कर देते हैं कि खर्च केवल ऑफिस के काम के लिए हुआ है, तो इस पर छूट मिल सकती है, बशर्ते कंपनी के पास इसका पूरा रिकॉर्ड हो।
- एड्रेस प्रूफ के तौर पर क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट
पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में अब थोड़ी राहत दी गई है। अब आप अपने क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट का उपयोग पते के प्रमाण (Address Proof) के रूप में कर सकेंगे।
ध्यान दें: यह स्टेटमेंट 3 महीने से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए।
- टैक्स भुगतान के आसान विकल्प
सरकार ने अब आधिकारिक रूप से क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग को आयकर भरने के लिए वैध इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की सूची में शामिल कर लिया है। इससे करदाताओं को भुगतान करने में अधिक लचीलापन मिलेगा और कागजी कार्रवाई कम होगी।














