प्रधानमंत्री जनमन योजना : कांकेर के कमार परिवारों की बदलती तकदीर

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रहने वाली कमार जनजाति, जो कभी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्षरत थी, आज विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रही है। नरहरपुर विकासखंड के मावलीपारा, बिहावापारा, धनोरा और डोमपदर सहित लगभग 13 गांवों में रहने वाले इस विशेष रूप से पिछड़े जनजातीय समूह (PVTG) के जीवन में अब खुशहाली की नई लहर देखी जा रही है।
योजनाओं का जमीनी असर
प्रधानमंत्री जनमन योजना के सफल संचालन से इन क्षेत्रों के 72 परिवारों की जीवनशैली में क्रांतिकारी बदलाव आया है। प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप अब इन ग्रामीणों को निम्नलिखित सुविधाएं सुलभ हो रही हैं:
आवास और बुनियादी ढांचा: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 22 परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही, सड़कों के जाल ने इन सुदूर गांवों को शहरों और बाजारों से जोड़ दिया है।
स्वास्थ्य और पोषण: मोबाइल मेडिकल यूनिट की मदद से घर-घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँच रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार हुआ है।
स्वच्छ जल और बिजली: ‘नल-जल योजना’ के जरिए अब हर कमार परिवार के आंगन तक साफ पीने का पानी पहुँच रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
केंद्र और राज्य सरकार के आपसी समन्वय से इन परिवारों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में ये परिवार आयुष्मान कार्ड, जनधन खाते, राशन कार्ड और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का सीधा लाभ उठा रहे हैं।
9 केंद्रीय मंत्रालयों के सहयोग से चल रही इन 11 विशेष गतिविधियों ने न केवल इन परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा किया है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक ठोस आधार तैयार किया है। आज कांकेर के ये जनजातीय गांव विकास की एक नई इबारत लिख रहे हैं।
















