अमित बघेल को उच्च न्यायालय से बड़ी राहत : विवादित बयान मामले में मिली अंतरिम जमानत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बने जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल को माननीय उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के अपमान से जुड़े मामले में विवादास्पद टिप्पणी करने के आरोपी बघेल को कोर्ट ने सशर्त अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है।
मामले की पृष्ठभूमि और अदालती फैसला
लगभग पांच महीने पहले राजधानी रायपुर के वीआईपी चौक पर स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने की एक घटना हुई थी। इस घटना के विरोध में अमित बघेल ने कुछ समुदायों (विशेषकर अग्रवाल और सिंधी समाज) के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर के विभिन्न पुलिस थानों जैसे तेलीबांधा, कोतवाली और देवेंद्र नगर में बघेल के खिलाफ कुल 14 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थीं। अब उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए उन्हें 3 महीने की अंतरिम जमानत प्रदान की है।
न्यायालय द्वारा लगाई गई कड़ी शर्तें
अदालत ने जमानत देते समय कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबंध भी लगाए हैं:
शहर निर्वासन: बघेल को जमानत की अवधि के दौरान रायपुर शहर की सीमा से बाहर रहना होगा।
प्रवेश की अनुमति: उन्हें रायपुर में केवल अदालती कार्यवाही या पेशी के समय ही उपस्थित होने की अनुमति होगी।
क्या था विवाद का मुख्य कारण?
अमित बघेल पर आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति खंडित होने के बाद सार्वजनिक रूप से समाज के प्रतिष्ठित महापुरुषों—जैसे महाराजा अग्रसेन, दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी—के खिलाफ बेहद अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। उन्होंने कुछ समुदायों की राष्ट्रीयता और उनके इतिहास पर भी तीखी और विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था।
राज्यव्यापी विरोध और जनाक्रोश
बघेल के इन बयानों के बाद छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। रायपुर, रायगढ़ और सरगुजा समेत कई जिलों में अग्रवाल और सिंधी समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपना रोष प्रकट किया था। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की थी, जिसके बाद पुलिस ने उन पर शिकंजा कसा था।
















