छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं के सिंडिकेट का भंडाफोड़ : रायपुर से तीन जालसाज पुलिस की गिरफ्त में

रायपुर। प्रदेश में अवैध और नकली दवाओं के काले कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग की विशेष टीम ने जाल बिछाकर इस अवैध नेटवर्क से जुड़े तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
कैसे खुला राज?
इस पूरे मामले की शुरुआत कुछ महीने पहले नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट से हुई थी, जहाँ संदिग्ध दवाओं की एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी। विभाग द्वारा की गई गहन पड़ताल और सप्लाई चेन की कड़ियों को जोड़ने पर तीन नाम सामने आए— रोचक अग्रवाल (इंदौर), सुरेंद्र कामनानी (भाटापारा) और खेमराज बानी (सारंगढ़)। सोमवार को विभाग ने कार्रवाई करते हुए इन तीनों को रायपुर से हिरासत में ले लिया।
छापेमारी में मिले अहम सुराग
जांच के दौरान टीम ने सारंगढ़ के ‘सरस्वती मेडिकल स्टोर’ पर भी दबिश दी थी। पिछले साल दिसंबर में हुई इस रेड में नकली दवाओं के स्टॉक और उनके वितरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य बरामद हुए थे। इन्ही सबूतों के आधार पर प्रशासन इस संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड्स तक पहुँचने में कामयाब रहा।
अन्य राज्यों से जुड़े हो सकते हैं तार
अधिकारियों का मानना है कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं है। शुरुआती पूछताछ में ऐसे संकेत मिले हैं कि इस गिरोह के तार पड़ोसी राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। प्रशासन अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नकली दवाएं कहाँ बनाई जा रही थीं और इन्हें किन-किन इलाकों में खपाया गया।
प्रशासन की चेतावनी:
विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे केवल विश्वसनीय और लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें। किसी भी संदिग्ध दवा या विक्रेता की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।
















