सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने बुलाई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, ‘जीरो फेटेलिटी’ का रखा लक्ष्य

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने और मौतों के आंकड़े को शून्य पर लाने के लिए परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और नगरीय विभागों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने दुर्घटना रोकने से लेकर घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने तक की व्यवस्था चाक-चौबंद करने पर जोर दिया।
बैठक के प्रमुख बिंदु:
ब्लैक स्पॉट सुधार: प्रदेशभर के चिन्हित 23 ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षात्मक और सुधारात्मक कार्य जल्द पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘पीएम-राहत’ और ‘राहवीर’ योजना: सड़क हादसों के पीड़ितों को तुरंत मदद दिलाने और 1.50 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है ताकि लोग घबराए बिना घायलों की मदद के लिए आगे आएं।
ग्रामीण बस सेवा का विस्तार: दूरस्थ और वनांचलों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ का दायरा बढ़ाया जाएगा। कोंटा-जगरगुंडा जैसे दुर्गम क्षेत्र में बस सेवा शुरू होने से जहां 6 घंटे का सफर घटकर सिर्फ 45 मिनट रह गया है, वैसी ही सुविधा अन्य वंचित इलाकों में भी पहुंचाई जाएगी।
पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी: पर्यटन मिशन के साथ परिवहन विभाग को जोड़कर प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुगम रास्ते बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।
वाहन फिटनेस और आधुनिक तकनीक: वाहनों की तकनीकी जांच के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों को प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही, 15 साल पुराने वाहनों के नवीनीकरण के नियमों का कड़ाई से पालन होगा।
ई-ट्रैक और एचएसआरपी: पारदर्शिता लाने के लिए सीसीटीवी और सेंसर आधारित कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट (ई-ट्रैक) व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे केवल योग्य चालकों को ही लाइसेंस मिले। इसके अलावा, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अभियान में तेजी लाने और लंबित चालानों की वसूली के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
















