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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में बदला ग्रामीण परिदृश्य : सरकारी योजनाओं से 47 हजार से अधिक परिवारों को मिला पक्का आशियाना

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ग्रामीण अंचलों में जीवन-यापन करने वाले गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पक्के मकान का सपना अब धरातल पर उतर रहा है। खपरैल और मिट्टी की कच्ची दीवारों में मौसम की मार झेलने वाले हजारों परिवारों के जीवन में सुरक्षा, स्वाभिमान और स्थायित्व का नया उजाला फैला है। केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी प्राथमिकताओं के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में आवास निर्माण के कार्यों में अभूतपूर्व तेजी आई है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): 47 हजार से ज्यादा घर बनकर तैयार

जिले में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण’ के अंतर्गत बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है।

कुल स्वीकृत आवास: अब तक जिले में कुल 56,455 मकानों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 47,019 घर पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुके हैं।

2016-2023 की प्रगति: 2016 से 2018 के बीच मंजूर 10,797 घरों में से 10,650 पूरे किए गए। वहीं, 2019 से 2023 के दौरान स्वीकृत 16,811 में से 15,234 मकान पूर्ण हुए।

2024-26 का वर्तमान सत्र: हालिया अवधि में 28,847 मकानों की स्वीकृति के साथ निर्माण कार्य को नई गति मिली। इसमें से अब तक 21,115 मकान बनकर तैयार हैं, जबकि विभिन्न किस्तों का पारदर्शी भुगतान लगातार जारी है।

मुख्यमंत्री आवास और ‘पीएम जनमन’ से मिला कमजोर वर्गों को सहारा

मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण):

सीमित संसाधनों वाले वंचित परिवारों के लिए यह योजना वरदान साबित हो रही है। जिले में मंजूर 423 आवासों के लिए प्रथम किस्त जारी हो चुकी है, जिनमें से 249 परिवार अपने नए पक्के मकानों में शिफ्ट भी हो चुके हैं।

पीएम जनमन योजना (विशेष पिछड़ी जनजाति):

समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के ध्येय से गौरेला विकासखंड के विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों को प्राथमिकता दी जा रही है। यहाँ स्वीकृत 1,080 आवासों में से 886 मकानों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है, जिससे सुदूर क्षेत्रों के जनजातीय परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक परिवेश प्राप्त हुआ है।

सुरक्षित बचपन और बेहतर भविष्य का आधार

कच्चे घरों की सीलन, टपकती छतों और असुरक्षा के साये से बाहर निकलकर अब बच्चे शांत माहौल में पढ़ाई कर पा रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को स्वास्थ्यप्रद परिवेश मिला है। जिला प्रशासन द्वारा वित्तीय किस्तों के समयबद्ध भुगतान, तकनीकी बाधाओं के समाधान और नियमित फील्ड मॉनिटरिंग के जरिए शेष निर्माणाधीन मकानों को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह बदलाव केवल ईंट और सीमेंट की संरचना का निर्माण नहीं है, बल्कि ‘अंत्योदय’ की भावना के साथ आत्मनिर्भर और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत नींव है।

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