देश में डेंगू का बढ़ता प्रकोप : गंभीर लक्षणों और बचाव के बारे में जानें

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। इस वर्ष देश भर में डेंगू के मामलों में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला यह बुखार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर स्थिति गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है।
डेंगू के गंभीर और घातक रूप
डेंगू संक्रमण चार अलग-अलग सीरोटाइप (स्ट्रेन) के वायरस के कारण फैलता है। वायरस के प्रकार के आधार पर यह कई बार गंभीर रूप ले सकता है, जिसे डेंगू हेमरेजिक फीवर (DHF) या डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) कहा जाता है। हालांकि ऐसे मामले कम देखने को मिलते हैं, लेकिन बच्चों को इसका खतरा सबसे अधिक होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर इलाज कराने से इस बीमारी से होने वाले जोखिम को काफी हद तक टाला जा सकता है।
किन लक्षणों पर तुरंत दें ध्यान?
सामान्य तौर पर डेंगू की शुरुआत इन लक्षणों से होती है:
तेज बुखार और सिरदर्द
आंखों के पिछले हिस्से में दर्द
जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द
थकान, मितली, उल्टी और त्वचा पर चकत्ते
गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत (आमतौर पर बुखार के 3 से 7 दिन बाद):
यदि मरीज में ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता होती है:
पेट में तेज और लगातार दर्द
बार-बार उल्टी आना या उल्टी में खून आना
नाक या मसूड़ों से खून बहना
तेजी से सांस लेना और अत्यधिक सुस्ती या बेचैनी महसूस होना
प्लेटलेट काउंट में भारी गिरावट
गंभीर स्थिति में शरीर पर प्रभाव
जब डेंगू गंभीर रूप ले लेता है, तो शरीर में ब्लड प्लाज्मा का रिसाव होने लगता है और ब्लीडिंग स्पॉट्स उभर सकते हैं। इससे लिवर, फेफड़े और दिल जैसे अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। ब्लड प्रेशर अचानक बहुत कम होने से मरीज को शॉक लग सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
उपचार और देखभाल के उपाय
गंभीर मामलों में: गंभीर डेंगू का कोई विशेष एंटी-वायरल इलाज नहीं है। ऐसे मरीजों को आईसीयू में रखकर लक्षणों के आधार पर फ्लूइड थेरेपी, ऑक्सीजन और प्लेटलेट या ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ सकती है।
सामान्य मामलों में: यदि संक्रमण हल्का है, तो डॉक्टर की सलाह के तहत भरपूर आराम करें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और लिक्विड डाइट (जैसे नारियल पानी) लें। प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए पपीते के पत्ते का रस, गिलोय, कीवी, अनार और चुकंदर जैसी चीजों को आहार में शामिल किया जा सकता है। साथ ही, समय-समय पर प्लेटलेट काउंट की जांच करवाते रहें।
















