छत्तीसगढ़

उच्च शिक्षा के लिए 1306 करोड़ रुपये का बजट पास, शिक्षण संस्थानों का होगा कायाकल्प

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और भविष्योन्मुख बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उच्च शिक्षा विभाग की 1306 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगें ध्वनि मत से पारित कर दी गईं।

अनुदान मांगों पर चर्चा का उत्तर देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य का बौद्धिक और आर्थिक विकास केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही संभव है। उन्होंने ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के विजन को रेखांकित करते हुए बताया कि सरकार GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

बजट की मुख्य विशेषताएं और बुनियादी ढांचा

सरकार ने केवल बजट राशि ही नहीं बढ़ाई, बल्कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच को भी प्राथमिकता दी है।

संस्थानों में वृद्धि: राज्य में कॉलेजों की संख्या 335 से बढ़कर अब 343 हो गई है। हाल ही में संगीत, विधि और शारीरिक शिक्षा सहित 8 नए स्नातक कॉलेज खोले गए हैं।

नया निर्माण: प्रदेश के 25 महाविद्यालयों के लिए नए भवनों का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए 2500 करोड़ रुपये (संभावित कुल निवेश) का प्रावधान है। साथ ही कई कॉलेजों में अतिरिक्त कमरों और ऑडिटोरियम का निर्माण भी होगा।

विशेष क्षेत्रों पर ध्यान: अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के लिए बजट को बढ़ाकर 249.61 करोड़ और अनुसूचित जाति क्षेत्रों के लिए 120.23 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

शिक्षा की गुणवत्ता और आधुनिकीकरण

मंत्री वर्मा ने बताया कि प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं:

उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence): राज्य के 36 सरकारी कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020): प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति लागू कर दी गई है। इसमें कौशल विकास से जुड़े 42 नए पाठ्यक्रम और ‘मल्टीपल एंट्री-एग्जिट’ जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।

NAAC मूल्यांकन: गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब तक 200 सरकारी कॉलेजों और 5 विश्वविद्यालयों का सफल नैक मूल्यांकन कराया जा चुका है।

केंद्र और राज्य की साझा पहल

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के जरिए भी राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिल रही है। बस्तर के शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को अनुसंधान के लिए 100 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति मिली है। इसके अतिरिक्त, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राजनांदगांव और सरगुजा जैसे जिलों में ‘जेंडर इंक्लूजन’ पहल के तहत भारी निवेश किया जा रहा है।

निष्कर्ष: मंत्री वर्मा ने भरोसा जताया कि यह बजट न केवल विद्यार्थियों को रोजगार के नए अवसर देगा, बल्कि छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख ‘एजुकेशन हब’ के रूप में स्थापित करेगा।

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