ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम : अब 31 दिसंबर तक मिली ‘सिम बाइंडिंग’ से राहत

नई दिल्ली (एजेंसी)। डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स के लिए प्रस्तावित ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) नियम चर्चा में है। ताजा अपडेट के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) ने इस नियम को लागू करने की समय-सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है।
क्यों बढ़ी समय-सीमा?
शुरुआत में सरकार इस नियम को 1 मार्च से प्रभावी बनाना चाहती थी। हालांकि, तकनीकी चुनौतियों के कारण मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और दिग्गज टेक कंपनियों ने अतिरिक्त समय की मांग की थी।
तकनीकी बाधाएं: गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों ने सूचित किया कि उनके ऑपरेटिंग सिस्टम (Android और iOS) में इस नियम को एकीकृत करने के लिए व्यापक बदलाव की जरूरत है।
एप्पल की चुनौती: विशेष रूप से एप्पल ने आईओएस (iOS) की तकनीकी सीमाओं का हवाला देते हुए कहा कि सिम बाइंडिंग को सुरक्षित रूप से लागू करने के लिए उन्हें और समय चाहिए।
सरकारी फैसला: कंपनियों की दलीलों को स्वीकार करते हुए दूरसंचार विभाग ने 30 मार्च से ही कंपनियों को डेडलाइन विस्तार की सूचना देना शुरू कर दिया था।
क्या है सिम बाइंडिंग और यह कैसे काम करेगा?
सिम बाइंडिंग एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जो आपके मैसेजिंग अकाउंट को सीधे आपके फोन में मौजूद फिजिकल सिम कार्ड से जोड़ देती है।
अनिवार्य उपस्थिति: इस नियम के लागू होने के बाद, आपका व्हाट्सएप या टेलीग्राम केवल तभी काम करेगा जब वह सिम कार्ड उसी हैंडसेट में लगा हो जिससे अकाउंट बनाया गया है।
पहुंच पर रोक: यदि आप सिम कार्ड निकाल देते हैं या फोन बदलते हैं, तो ऐप का एक्सेस तब तक बंद हो जाएगा जब तक सिम दोबारा प्रमाणित न हो जाए।
फर्जी खातों पर लगाम: इसका मुख्य उद्देश्य उन फर्जी अकाउंट्स को खत्म करना है जो बिना सक्रिय सिम के या वर्चुअल नंबरों के जरिए चलाए जा रहे हैं।
इस नियम की आवश्यकता क्यों?
वर्तमान में साइबर अपराधी अक्सर फर्जी पहचान या बिना सिम वाले डिवाइस का उपयोग करके मैसेजिंग ऐप्स के जरिए ठगी को अंजाम देते हैं। ट्रैक करना मुश्किल होने के कारण वे बच निकलते हैं।
सुरक्षा का लाभ: सिम बाइंडिंग सुनिश्चित करेगा कि हर डिजिटल पहचान एक असली और सक्रिय मोबाइल नंबर से जुड़ी हो। इससे न केवल यूजर की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि साइबर अपराधियों की पहचान करना भी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए आसान हो जाएगा।
दिसंबर के अंत तक का यह समय कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर अपडेट करने और यूजर्स को इस बड़े बदलाव के लिए तैयार करने का अवसर देगा।














