छत्तीसगढ़

जन-सरोकार का नया अध्याय : मुख्यमंत्री निवास में ‘जनदर्शन’ से त्वरित समाधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन की परिभाषा अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरातल पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के ‘जनदर्शन’ के माध्यम से साकार हो रही है। राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस जन-संवाद कार्यक्रम में प्रशासन और जनता के बीच की दूरियां मिटती नजर आईं। मुख्यमंत्री ने न केवल लोगों की समस्याओं को सुना, बल्कि कई मामलों में तत्काल निर्णय लेकर संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की।

इस विशेष आयोजन में प्रदेश के विभिन्न कोनों से पहुंचे लगभग 1950 नागरिकों ने अपनी मांगें और शिकायतें मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। श्री साय ने प्रत्येक आवेदन पर गंभीरता दिखाई और संबंधित विभागों को मौके पर ही उचित कार्यवाही के कड़े निर्देश दिए।

दिव्यांगों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव

मुख्यमंत्री ने शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे नागरिकों की आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया। इस दौरान:

सवारी बनी सहारा: खमतराई के जीवन दास मानिकपुरी और आरंग के भारत साहू को बैटरी चलित ट्राइसिकल सौंपी गई, जिससे अब उनकी गतिशीलता किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहेगी।

उपकरणों का वितरण: रायपुर के चंदू यादव और सुमन साहू को ट्राइसिकल व व्हीलचेयर प्रदान की गई। वहीं, श्रवण बाधित सागर नायक और उमेश पटेल को सुनने की मशीन (हियरिंग एड) दी गई, जिससे उनके जीवन में संवाद की नई किरण जगी है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए तत्काल आर्थिक मदद

जनदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘अंत्योदय’ के संकल्प को दोहराते हुए जरूरतमंदों को चेक वितरित किए:

गंभीर बीमारी में संबल: महासमुंद की बसंती साव, जो पैरों के लकवा से जूझ रही हैं, उन्हें इलाज के लिए 5 लाख रुपये की बड़ी आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई।

शिक्षा और भविष्य: रायगढ़ के दिव्यांग छात्र ओमप्रकाश निषाद को उनकी उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए और रायपुर के राज शर्मा को शारीरिक अक्षमता के कारण 20-20 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई।

सामाजिक सहायता: फूल गिरी गोस्वामी को उनकी बेटी के विवाह हेतु शासन की ओर से 20 हजार रुपये की सहायता दी गई।

प्रशासनिक बाधाओं का मौके पर अंत

तात्यापारा निवासी 60 वर्षीय हनुमंत राव की कहानी ने सबका ध्यान खींचा। माता-पिता के देहांत के बाद राशन कार्ड जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भटक रहे राव की समस्या को मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से सुना। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नियमों के घेरे से बाहर निकलकर मानवीय आधार पर तत्काल उनका राशन कार्ड बनाया जाए, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

“जनदर्शन महज आवेदन जमा करने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता के प्रति हमारी जवाबदेही का प्रमाण है। शासन का हर अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि अंतिम व्यक्ति की समस्या का समाधान पूरी संवेदनशीलता के साथ हो।” — विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री

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