स्वावलंबन की नई इबारत : बेमेतरा की महिलाओं ने सिलाई से बुनी सफलता की कहानी

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का एक छोटा सा गांव, मनियारी, आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुका है। यहाँ की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि कौशल को सरकारी योजनाओं का साथ मिल जाए, तो आर्थिक तंगी कभी भी सपनों के आड़े नहीं आती।
बचत से शुरू हुआ बदलाव का सफर
इस कहानी की सूत्रधार हैं अनुसूया साहू। सिलाई में निपुण होने के बावजूद संसाधनों के अभाव में उनका हुनर घर की चारदीवारी तक सीमित था। बदलाव की लहर तब आई जब मार्च 2024 में ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। अनुसूया ने इन पैसों को खर्च करने के बजाय भविष्य के निवेश के रूप में देखा।
छह महीने की निरंतर बचत के बाद उन्होंने अपनी पहली सिलाई मशीन खरीदी। छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह काम उनकी मेहनत और फिनिशिंग के कारण जल्द ही गांव में मशहूर हो गया।
एक से बने पांच: सामूहिक प्रयास की जीत
अनुसूया की सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं के भीतर भी कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा किया। प्रेरणा का यह सिलसिला बढ़ा और उनके साथ ओमकारेश्वरी, पार्वती, गंगा और हेमिनी भी जुड़ गईं।
सरकारी योजनाओं का मेल: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में इन महिलाओं ने ‘प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना’ का लाभ उठाया।
पूंजी का सही निवेश: योजना से प्राप्त 5000 रुपये की राशि को इन्होंने अपने सिलाई व्यवसाय को बड़ा करने और नई मशीनें खरीदने में लगाया।
आर्थिक मजबूती और सामाजिक सम्मान
आज ये पांचों महिलाएं मिलकर एक सफल सिलाई केंद्र संचालित कर रही हैं। अब उनके द्वारा सिले गए कपड़ों की मांग न केवल मनियारी में, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी बढ़ गई है।
“यह सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि हमारे आत्मसम्मान की लड़ाई थी। आज हम अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पा रही हैं और घर के फैसलों में हमारी राय मायने रखती है।”
आर्थिक आजादी: अब ये महिलाएं किसी पर निर्भर नहीं हैं।
बेहतर जीवन स्तर: बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम।
प्रेरणा का स्रोत: गांव की अन्य युवतियों के लिए वे एक रोल मॉडल बन चुकी हैं।
मनियारी की इन पांच महिलाओं की कहानी यह सिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद, सही दिशा और दृढ़ इच्छाशक्ति से समाज में एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
















