छत्तीसगढ़

सुकमा की नई सुबह : बंदूकों की गूँज थमी, अब गूँज रहे हैं सेहत और मुस्कान के तराने

सुकमा। जो कभी संघर्ष और भय के साये में घिरा रहता था, आज विकास और आधुनिक चिकित्सा की एक नई इबारत लिख रहा है। जैसे-जैसे क्षेत्र से अशांति के बादल छंट रहे हैं, शासन और प्रशासन की पहुँच अब अंतिम छोर पर बसे ग्रामीणों तक सुगम हो गई है। हाल ही में आयोजित दो दिवसीय ‘सुपर स्पेशलिटी मेगा हेल्थ कैंप’ ने यह सिद्ध कर दिया है कि बस्तर का यह अंचल अब हिंसा को पीछे छोड़कर एक स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ा चुका है।

विश्वास की नई कड़ी: प्रशासन और जनता का संगम

जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशाल शिविर का शुभारंभ जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने किया। बस्तर कमिश्नर श्री डोमन सिंह के निर्देशों और कलेक्टर श्री अमित कुमार के कुशल प्रबंधन का ही परिणाम था कि इस शिविर में उन दुर्गम क्षेत्रों से भी लोग निकलकर आए, जो कभी मुख्यधारा से पूरी तरह कटे हुए थे।

शिविर के कुछ मुख्य आकर्षण और उपलब्धियाँ इस प्रकार रहीं:

भारी जनभागीदारी: लगभग 6,500 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

विशेषज्ञ सेवाएँ: 21 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और 40 स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने अपनी सेवाएँ दीं।

जटिल रोगों का समाधान: शिविर में कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और स्त्री रोग जैसी गंभीर बीमारियों का निःशुल्क परामर्श और इलाज उपलब्ध कराया गया।

स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: आँकड़ों की जुबानी

सुकमा के मिनी स्टेडियम में आयोजित इस कैंप ने केवल इलाज ही नहीं किया, बल्कि लोगों के जीवन में उम्मीद की रोशनी भी भरी।

श्रेणी, लाभान्वित संख्या, प्रभाव

नेत्र ज्योति,989 चश्मे वितरित,बुजुर्गों की धुंधली दुनिया को नई रोशनी मिली।
बाल स्वास्थ्य,”1,500 बच्चों की जाँच”,कुपोषण मुक्त भविष्य की ओर एक बड़ा कदम।
महिला सुरक्षा,85 कैंसर स्क्रीनिंग,महिलाओं में कैंसर के प्रति जागरूकता और शीघ्र पहचान।
डिजिटल हेल्थ,”2,300 आभा आईडी”,भविष्य के लिए डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का निर्माण।
वित्तीय सुरक्षा,153 आयुष्मान कार्ड,इलाज के खर्च से गरीबों को बड़ी राहत।

नक्सलवाद के साये से बाहर निकलता समाज

यह आयोजन केवल एक मेडिकल कैंप नहीं, बल्कि समाज के बदलते नजरिए का प्रतीक है। जहाँ कभी गोलियों की आवाज से लोग घरों में दुबक जाते थे, आज वहां 3,700 से अधिक ग्रामीण बेखौफ होकर अपनी सेहत सुधारने पहुँचे। इसके साथ ही दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंगों का वितरण और आयुर्वेदिक चिकित्सा ने इस शिविर को बहुआयामी बना दिया।

सुकमा आज देश के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बनकर उभर रहा है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जब सुरक्षा और सेवा का तालमेल होता है, तो विकास की किरणें सबसे घने जंगलों को भी चीरकर बाहर आती हैं। आज सुकमा का हर मुस्कुराता चेहरा एक ही बात कह रहा है— स्वास्थ्य ही असली सुरक्षा है।

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