छत्तीसगढ़

महानदी की लहरों पर ईको-टूरिज्म का नया ठिकाना : बलौदाबाजार का धमनी गांव

बलौदाबाजार। प्रकृति से जुड़ाव और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित ‘ईको-पर्यटन’ अब केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरती सच्चाई बन गया है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए, बलौदाबाजार वनमण्डल के अंतर्गत आने वाला धमनी गांव छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक चमकते सितारे के रूप में उभर रहा है।

प्रकृति और रोमांच का संगम

महानदी के शांत तट पर बसे इस गांव को एक ईको-विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। हाल ही में यहाँ पर्यटकों के लिए नौकाविहार (बोटिंग) की सुविधा शुरू की गई है। अब प्रकृति प्रेमी न केवल यहाँ की हरियाली का लुत्फ उठा सकेंगे, बल्कि महानदी की लहरों पर नौकायन का आनंद लेते हुए सुकून के पल भी बिता सकेंगे।

स्थानीय सशक्तिकरण और संरक्षण

इस परियोजना का खाका वन मंत्री केदार कश्यप और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य दोहरा है:

पर्यावरण सुरक्षा: वन और वन्यजीवों को क्षति पहुँचाए बिना पर्यटन को बढ़ावा देना।

रोजगार सृजन: गांव के युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को इस परियोजना से सीधे जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना।

“यह पहल जन-भागीदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ वन संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास को भी गति मिल रही है।” — धम्मशील गणवीर, वनमण्डलाधिकारी

भविष्य की योजनाएँ

पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए यहाँ रुकने की व्यवस्था (Home-stays) भी विकसित की जा रही है। वन विभाग का लक्ष्य धमनी को राज्य के शीर्ष ईको-टूरिज्म केंद्रों में स्थापित करना है, ताकि लोग शहर के शोर-शराबे से दूर यहाँ आकर शांति और शुद्ध वातावरण का अनुभव कर सकें।

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