बस्तर में शांति की नई राह : मुख्यमंत्री साय ने कहा— सिमट रहा है माओवाद का दायरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। बस्तर क्षेत्र में ‘शांति और विश्वास’ के बढ़ते प्रभाव के चलते किस्टाराम क्षेत्र के चार सक्रिय इनामी माओवादियों (संयुक्त इनाम 8 लाख रुपये) ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे “नक्सल मुक्त बस्तर” के संकल्प की ओर एक ठोस और निर्णायक कदम बताया है।
मुख्यमंत्री ने इस बदलाव के पीछे तीन मुख्य स्तंभों को श्रेय दिया है:
सुरक्षा बलों का समन्वय: पुलिस और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल और निरंतर दबाव।
रणनीतिक कैंप स्थापना: संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कैंपों की मजबूती से माओवादियों की सक्रियता कम हुई है।
कनेक्टिविटी का विस्तार: अंदरूनी इलाकों तक सड़कों का जाल और बेहतर संचार सुविधाओं ने विकास की राह आसान की है।
मुख्यधारा से जुड़ने का बढ़ता विश्वास
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि माओवादियों का जनाधार अब तेजी से खिसक रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है— जो भी हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होना चाहता है, उसे न केवल सुरक्षा दी जाएगी, बल्कि एक सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे।
“बस्तर अब हिंसा से हटकर विकास और शांति की नई पहचान बना रहा है। हमारा लक्ष्य एक सुरक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है, जहाँ हर नागरिक बिना किसी भय के रह सके।” — विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री
यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में शासन और प्रशासन के प्रति ग्रामीणों का भरोसा बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने प्रतिबद्धता दोहराई है कि शांति और प्रगति की यह यात्रा बिना रुके जारी रहेगी।
















