छत्तीसगढ़ में जनजातीय समृद्धि का नया मार्ग : ‘सांसद संकुल विकास परियोजना’ से बदलेगी बस्तर और सरगुजा की सूरत

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में सांसद संकुल विकास परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परियोजना जनजातीय क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।
परियोजना के मुख्य आकर्षण और उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर पैदा करना है। इससे न केवल आदिवासियों की आय बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रों से होने वाले पलायन (Migration) पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
क्लस्टर आधारित विकास: गांवों के छोटे-छोटे समूह (क्लस्टर) बनाकर उन्हें विकास के मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है।
संसाधनों का दोहन: स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर ग्रामीणों का कौशल विकास (Skill Development) किया जा रहा है।
आर्थिक सशक्तिकरण: धान की विशेष किस्मों के निर्यात के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन (गौ, बकरी, शूकर पालन) को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
वनोपज का वैल्यू एडिशन: महुआ, इमली और चिरौंजी जैसे पारंपरिक वनोपजों को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए उनके ‘वैल्यू एडिशन’ पर ध्यान दिया जा रहा है।
नई औद्योगिक नीति और प्रशासनिक समन्वय
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में अनुसूचित जाति और जनजाति के उद्यमियों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इन लाभों को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना सुनिश्चित करें।
विशेष कदम: परियोजना के सुचारू संचालन के लिए जल्द ही नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी ताकि शासन और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।
क्षेत्रीय कवरेज और प्रगति
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रमुख संकुलों की प्रगति रिपोर्ट साझा की गई, जिनमें शामिल हैं:
लैलूंगा संकुल (रायगढ़)
परशुरामपुर संकुल (सरगुजा)
बकावंड संकुल (बस्तर)
माता राजमोहिनी देवी संकुल (बलरामपुर)
धनोरा संकुल (केशकाल)
एक साझा प्रयास
बैठक में उपस्थित विशेषज्ञ वी. सतीश ने बताया कि यह परियोजना केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे आठ जनजातीय प्रधान राज्यों में NGO, सरकार और जनप्रतिनिधियों के साझा प्रयास से चल रही है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय जरूरतों को समझकर योजनाओं का क्रियान्वयन करें।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सांसद भोजराज नाग, चिंतामणि महाराज सहित कई विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
















