छत्तीसगढ़

आत्मनिर्भरता की नई चमक : हीराबाई निषाद की संघर्ष से सफलता तक की कहानी

ग़रियाबंद। ग़रियाबंद जिले के एक छोटे से गाँव मालगांव की रहने वाली श्रीमती हीराबाई निषाद आज महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकते।

शून्य से शिखर तक का सफर

हीराबाई की स्वावलंबन की यात्रा साल 2011 में शुरू हुई, जब उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को एकजुट करना शुरू किया। उनकी मेहनत को असली उड़ान तब मिली जब 2016 में वह छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ीं।

शुरुआत: उन्होंने “माता कृपा महिला स्व-सहायता समूह” बनाया।

प्रथम कदम: समूह के माध्यम से मिले 60 हजार रुपये के ऋण से उन्होंने बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया।

विकास: मात्र 8 बकरियों से शुरू हुआ यह सफर आज 50 बकरियों के झुंड तक पहुँच चुका है। एक बकरी को लगभग 15 हजार रुपये में बेचकर उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक नींव मजबूत की।

व्यवसाय का विविधीकरण और नवाचार

हीराबाई केवल बकरी पालन तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने अपनी आय को नए व्यवसायों में निवेश किया:

दोना-पत्तल निर्माण: बकरियों की बिक्री से मिले पैसों से उन्होंने 1.50 लाख रुपये की ऑटोमैटिक मशीन खरीदी, जिससे सालाना 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होने लगी।

अगरबत्ती उद्योग: व्यापार को और बढ़ाते हुए उन्होंने 1.80 लाख रुपये की लागत से अगरबत्ती बनाने की मशीन भी लगाई।

परिवहन और लॉजिस्टिक्स: उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 6 लाख रुपये की एक छोटी मालवाहक गाड़ी खरीदी। आज उनका बेटा इस गाड़ी के जरिए आसपास के गाँवों में सामान पहुँचाकर परिवार की आय बढ़ा रहा है।

आधुनिक खेती और सामाजिक प्रभाव

अपनी कड़ी मेहनत के दम पर हीराबाई ने खेती को भी आधुनिक बनाया। आज उनके पास स्वयं का ट्रैक्टर, ट्रॉली और थ्रेसर है, जिससे कृषि कार्यों में न केवल आसानी हुई है बल्कि मुनाफ़ा भी कई गुना बढ़ गया है।

“हीराबाई की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन सभी ग्रामीण महिलाओं के लिए एक संदेश है जो अपने दम पर पहचान बनाना चाहती हैं।”

आज वह अपने नाम की तरह ही पूरे गाँव के लिए ‘हीरा’ बनकर चमक रही हैं। उन्होंने न केवल अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकाला, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार के द्वार खोल दिए हैं।

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