कोर्ट के आदेश पर मकान खाली कराने पहुँची टीम के सामने आत्मदाह करने वाली महिला की मौत

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। घर खाली कराने की कार्रवाई के दौरान खुद को आग के हवाले करने वाली कांग्रेस कार्यकर्ता शबाना निशा (उर्फ रानी) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। लगभग 95 प्रतिशत झुलस चुकी शबाना का रायपुर के डीकेएस अस्पताल में उपचार चल रहा था, जहाँ शुक्रवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।
क्या था पूरा मामला?
यह हृदयविदारक घटना 22 जनवरी की दोपहर पचरीपारा इलाके में हुई थी। जिला न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए पुलिस और कोर्ट का अमला एक विवादित मकान का कब्जा दिलाने पहुँचा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब टीम घर खाली कराने की प्रक्रिया कर रही थी, तभी शबाना अचानक अंदर गईं और खुद पर मिट्टी तेल डालकर बाहर आ गईं। देखते ही देखते वह आग की लपटों से घिर गईं।
वहाँ मौजूद लोगों ने चादर और अन्य तरीकों से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थीं।
विवाद की जड़: 40 साल का आशियाना और मालिकाना हक
शबाना के परिजनों ने बताया कि वह उस मकान में पिछले चार दशकों से भी ज्यादा समय से रह रही थीं। पिछले कुछ महीनों से मकान खाली करने को लेकर दबाव बनाया जा रहा था।
विवाद का कारण: शबाना चाहती थीं कि मकान मालिक वह घर उन्हें ही बेच दे, लेकिन मालिक इसके लिए सहमत नहीं था।
कानूनी प्रक्रिया: मामला अदालत तक पहुँचा, जहाँ फैसला मकान मालिक के पक्ष में आया।
अंतिम परिणाम: कोर्ट के आदेश के बाद जब कब्जा लेने की टीम पहुँची, तो इस तनावपूर्ण स्थिति ने आत्मघाती कदम का रूप ले लिया।
इस घटना ने क्षेत्र में शोक की लहर फैला दी है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं कि ऐसी संवेदनशील स्थितियों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे।
















