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एयरटेल और गूगल का हाथ : अब RCS मैसेजिंग में AI रोकेगा स्पैम और फ्रॉड

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय टेलिकॉम दिग्गज भारती एयरटेल और टेक कंपनी गूगल ने हाथ मिलाया है ताकि देश में डिजिटल संदेशों को सुरक्षित बनाया जा सके। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य रिच कम्युनिकेशन सर्विस (RCS) का उपयोग करने वाले एंड्रॉयड यूजर्स को स्पैम मैसेज और धोखाधड़ी से बचाना है। इसके लिए कंपनी अब आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और बिजनेस वेरिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल करेगी।

सुरक्षित मैसेजिंग के लिए AI का पहरा

इस नई व्यवस्था के तहत, एयरटेल अपनी नेटवर्क इंटेलिजेंस को गूगल के RCS प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ रहा है। इसकी कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

रियल-टाइम डिटेक्शन: संदिग्ध लिंक या फर्जी ऑफर्स वाले मैसेज को AI तकनीक की मदद से तुरंत पहचाना और ब्लॉक किया जाएगा।

बिजनेस वेरिफिकेशन: अब कोई भी कंपनी बिना वेरिफिकेशन के मैसेज नहीं भेज पाएगी। एयरटेल यह सुनिश्चित करेगा कि मैसेज भेजने वाला बिजनेस असली और विश्वसनीय है।

बेहतर यूजर एक्सपीरियंस: सुरक्षा बढ़ने के बाद भी RCS के फीचर्स जैसे हाई-क्वालिटी फोटो, वीडियो शेयरिंग और रीड रिसीट्स पहले की तरह ही काम करते रहेंगे।

स्पैम के खिलाफ एयरटेल का रिपोर्ट कार्ड

एयरटेल ने अपनी सुरक्षा प्रणालियों की सफलता के कुछ प्रभावी आंकड़े भी साझा किए हैं:

पिछले डेढ़ साल में लगभग 71 अरब स्पैम कॉल्स रोकी गईं।

करीब 2.9 अरब संदिग्ध SMS को नेटवर्क स्तर पर ही ब्लॉक किया गया।

इन सुरक्षा उपायों की वजह से एयरटेल नेटवर्क पर होने वाले वित्तीय फ्रॉड में 68.7% की गिरावट दर्ज की गई है।

ध्यान दें: एयरटेल ने आगाह किया है कि जहाँ टेलिकॉम आधारित मैसेजिंग सुरक्षित हो रही है, वहीं कई OTT (Over-the-top) ऐप्स अभी भी कड़े सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे जोखिम बना रहता है।

सुरक्षा के चार प्रमुख स्तंभ

नई प्रणाली में सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए ‘मल्टी-लेयर फ्रेमवर्क’ तैयार किया गया है:

सेंडर की पहचान का टेलिकॉम लेवल पर सत्यापन।

DND (डू नॉट डिस्टर्ब) नियमों का सख्ती से पालन।

प्रमोशनल और लेन-देन (Transactional) वाले मैसेज का अलग-अलग वर्गीकरण।

संदिग्ध सेंडर्स के मैसेज को सीमित या पूरी तरह प्रतिबंधित करना।

यह साझेदारी भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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