महिलाओं में पीठ और कमर दर्द : कारण और बचाव के उपाय

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। अक्सर देखा गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं कमर दर्द (Back Pain) की समस्या से अधिक जूझती हैं। आजकल यह समस्या केवल बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कम उम्र की युवतियां भी इससे परेशान रहने लगी हैं। आइए जानते हैं कि महिलाओं में इस दर्द के पीछे मुख्य कारण क्या हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।
- आधुनिक जीवनशैली और बैठने का तरीका
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और ऑफिस में घंटों एक ही मुद्रा (Posture) में बैठकर काम करना कमर दर्द का सबसे बड़ा कारण है। लंबे समय तक झुककर बैठने या खड़े रहने से मांसपेशियों में लचीलापन कम हो जाता है और अकड़न पैदा होती है।
समाधान: काम के बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें और हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- पोषण की कमी और कमजोर हड्डियां
महिलाओं के शरीर को कैल्शियम, विटामिन-D और फास्फोरस की विशेष आवश्यकता होती है। अक्सर खान-पान में लापरवाही के कारण हड्डियां अंदरूनी रूप से कमजोर होने लगती हैं। विटामिन-D की कमी से हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम हो जाता है, जिससे हल्की चोट भी गंभीर कमर दर्द का कारण बन सकती है।
- हार्मोनल बदलाव और मासिक धर्म (PMS)
पीएमएस (Pre-Menstrual Syndrome) के कारण कई महिलाओं को पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले ही पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस होने लगता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन शरीर में पानी की कमी या कमजोरी इसे और बढ़ा सकती है।
- मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति)
40 से 50 वर्ष की आयु के बीच जब महिलाओं में मेनोपॉज का चरण शुरू होता है, तो शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। इस हार्मोन की कमी सीधे तौर पर हड्डियों की मजबूती को प्रभावित करती है, जिससे कमर दर्द की समस्या पुरानी और स्थायी हो सकती है।
- गर्भावस्था (Pregnancy)
प्रेगनेंसी के दौरान शरीर का केंद्र भार बदल जाता है और वजन बढ़ने के कारण रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेष रूप से दूसरी और तीसरी तिमाही में कमर दर्द एक आम समस्या बन जाती है।
- अन्य स्वास्थ्य स्थितियां
ऑस्टियोआर्थराइटिस: इस स्थिति में जोड़ों के बीच का कुशन कम होने लगता है, जिससे कूल्हों और पीठ में असहनीय दर्द होता है।
स्लिप डिस्क: भारी वजन उठाने या अचानक झटके के कारण भी डिस्क की समस्या हो सकती है।
विशेष टिप: कमर दर्द को नजरअंदाज न करें। नियमित योग, संतुलित आहार और सही मुद्रा (Posture) को अपनाकर आप इस समस्या से काफी हद तक राहत पा सकती हैं।
















