छत्तीसगढ़

भोरमदेव कॉरिडोर : छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का नया अध्याय

कबीरधाम। छत्तीसगढ़ सरकार ने नववर्ष के प्रथम दिन राज्य की जनता को एक बड़ी आध्यात्मिक और पर्यटन सौगात दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम स्थित ‘छत्तीसगढ़ के खजुराहो’ कहे जाने वाले भोरमदेव धाम में भव्य कॉरिडोर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नए साल की बधाई देते हुए इसे विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

लागत और प्रेरणा: लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित होगा।

केंद्र का सहयोग: यह परियोजना केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 का हिस्सा है।

धरोहर का संरक्षण: परियोजना के तहत भोरमदेव मंदिर के साथ-साथ मड़वा महल और छेरकी महल के आसपास के क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भोरमदेव केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हमारी सहस्र वर्षों की साधना और नागर शैली की वास्तुकला का जीवंत प्रमाण है। यहाँ की दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियाँ और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। इस कॉरिडोर के माध्यम से यहाँ की लोक परंपराओं, विशेषकर आदिवासी संस्कृति और शैव दर्शन के संगम को और अधिक मजबूती मिलेगी।

पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा

राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। नई पर्यटन नीति और होम-स्टे पॉलिसी के जरिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस कॉरिडोर के निर्माण से तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ेगी, जिससे कबीरधाम जिले की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री और अन्य अतिथियों के विचार

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह कॉरिडोर आने वाली कई पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नक्सलवाद के खात्मे और सुशासन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने खुशी जताते हुए कहा कि यह क्षेत्र की जनता की पुरानी मांग थी, जिसे अब धरातल पर उतारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि भोरमदेव के साथ-साथ पंचमुखी श्री बूढ़ा महादेव मंदिर का भी विकास किया जाएगा।

भोरमदेव कॉरिडोर न केवल छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि यह आधुनिक सुविधाओं और प्राचीन कला का एक बेजोड़ उदाहरण भी होगा। नववर्ष के दिन इस परियोजना का आगाज राज्य के स्वर्णिम भविष्य की ओर एक संकेत है।

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