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धमतरी में ‘बिहान’ से स्वरोजगार की क्रांति : आर्थिक आजादी की ओर बढ़ती ग्रामीण महिलाएं

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में ‘बिहान’ (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव का एक सशक्त माध्यम बन गई है। यहाँ की महिलाएं अब घर की चारदीवारी से निकलकर सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं और गांव की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं।

जिला प्रशासन की देखरेख में चल रही इस योजना के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। हाल ही में ग्राम संबलपुर के ‘क्लस्टर लेवल फेडरेशन’ (CLF) की महिलाओं से चर्चा करते हुए कलेक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, तभी एक समृद्ध समाज और जिले का निर्माण संभव है।

‘लखपति दीदी’ अभियान: बढ़ते कदम, बढ़ती आय

धमतरी जिले में आर्थिक सशक्तिकरण का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 1,200 से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। ये वे महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक है। प्रशासन ने इस सफलता को देखते हुए अगले वर्ष तक इस संख्या को 2,000 के पार ले जाने का लक्ष्य रखा है।

नवाचार और आधुनिक व्यवसाय से जुड़ीं महिलाएं

परंपरागत खेती-मजदूरी से हटकर बिहान की दीदियाँ अब आधुनिक बाज़ार की मांग के अनुसार नए व्यवसायों को अपना रही हैं। उनकी सफलता के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं:

कृषि एवं पशुपालन: मशरूम उत्पादन, उन्नत सब्जी बाड़ी और डेयरी फार्मिंग।

तकनीकी एवं सेवा क्षेत्र: ई-रिक्शा संचालन और बिजली के सामानों की बिक्री।

निर्माण एवं व्यापार: सेंट्रिंग प्लेट निर्माण, किराना स्टोर और डेली नीड्स की दुकानें।

कौशल विकास: फूड प्रोसेसिंग, सिलाई-कढ़ाई और स्थानीय उत्पादों का निर्माण।

हरित ऊर्जा से जुड़ेंगे रोजगार के अवसर

आने वाले समय में महिलाओं को ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना’ के माध्यम से हरित रोजगार से जोड़ने की तैयारी है। इसके तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को सोलर पैनल की आपूर्ति और उनके रखरखाव (Maintenance) का प्रशिक्षण देकर ‘वेंडर’ के रूप में पंजीकृत किया जाएगा, जिससे उन्हें आय का एक स्थायी और नया जरिया मिलेगा।

प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ‘आंचल महिला क्लस्टर संगठन’ के सर्वसुविधायुक्त भवन का उपयोग किया जा रहा है। यहाँ महिलाओं को न केवल डिजिटल लेनदेन और बैंकिंग की जानकारी दी जाती है, बल्कि उन्हें मार्केटिंग और उद्यम प्रबंधन (Enterprise Management) में भी दक्ष बनाया जा रहा है।

सामाजिक बदलाव की वाहक

आर्थिक आत्मनिर्भरता ने इन महिलाओं के सामाजिक स्तर को भी ऊंचा उठाया है। आज ये महिलाएं शिक्षा, बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और युवाओं के रोजगार जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। धमतरी की ये ‘लखपति दीदियाँ’ आज समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं, जो यह साबित करती हैं कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी विकास की मुख्यधारा का नेतृत्व कर सकती हैं।

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