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बजट 2026 : ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए बड़े बदलाव की तैयारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार का मुख्य ध्यान ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने पर हो सकता है। ताजा संकेतों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ग्रामीण विकास से जुड़ी प्रमुख योजनाओं के लिए बजट आवंटन में दो अंकों (double-digit) की भारी वृद्धि कर सकता है। इसका सीधा उद्देश्य न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करना भी है।

प्रमुख योजनाओं के लिए बढ़ सकता है फंड

वर्तमान वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय को 1.88 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। लेकिन आगामी बजट में इसे और विस्तार मिलने की उम्मीद है:

रोजगार गारंटी (VB-G RAM G): चर्चा है कि सरकार ‘मनरेगा’ (MGNREGS) की जगह एक नया मिशन ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) ला सकती है। इसके लिए 95,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान होने की संभावना है, जो मौजूदा खर्च से करीब 11% अधिक होगा।

ग्रामीण आवास (PMAY-G): ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ के तहत अगले पांच वर्षों में 2 करोड़ नए घर बनाने का लक्ष्य है। सर्वे और लाभार्थियों की सूची फाइनल होने के बाद, निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए सरकार इस बार भारी फंड जारी कर सकती है।

ग्रामीण सड़कें (PMGSY): गांव-गांव तक पक्की सड़कों का जाल बिछाने के लिए ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के चौथे चरण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

आर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब गांव में पैसा पहुँचता है, तो:

स्थायी संपत्ति का निर्माण: स्कूल, सड़क और पक्के घरों जैसे बुनियादी ढांचे तैयार होते हैं।

मांग में वृद्धि: ग्रामीणों की क्रय शक्ति बढ़ने से बाजार में एफएमसीजी (FMCG) और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ती है।

मजदूरों को सहारा: अकुशल श्रमिकों के लिए आय का एक निश्चित जरिया बना रहता है, जिससे पलायन में कमी आती है।

चुनौतियां और आगामी लक्ष्य

बीते वर्ष में लाभार्थियों की पहचान और सर्वे में समय लगने के कारण कुछ योजनाओं (जैसे आवास और सड़क) की रफ्तार धीमी रही थी। उदाहरण के लिए, 35 लाख घरों के लक्ष्य के मुकाबले करीब 18 लाख घर ही पूरे हो पाए। हालांकि, अब सूची तैयार होने के बाद सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन रुके हुए कामों को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए।

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