छत्तीसगढ़

बीजापुर में बदलती बयार : ‘नियद नेल्लानार’ और मनरेगा के संगम से संवर रहा 224 गांवों का भविष्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के वे दुर्गम इलाके, जो दशकों तक नक्सलवाद के साये में विकास से वंचित रहे, आज बदलाव की एक नई कहानी लिख रहे हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्लानार’ योजना और मनरेगा के प्रभावी तालमेल ने इन अंदरूनी क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है। बुनियादी सुविधाओं की पहुंच से अब इन गांवों में न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी सुधार देखने को मिल रहे हैं।

सुरक्षा के साथ समृद्धि का विस्तार

जिले में स्थापित 42 सुरक्षा शिविरों के दायरे में आने वाले 224 गांवों (67 ग्राम पंचायतें) को इस विकास अभियान से जोड़ा गया है। स्थानीय ग्रामीणों को उन्हीं के गांव में काम उपलब्ध कराकर न केवल पलायन रोका गया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी गई है।

मुख्यधारा से जुड़ाव: पीड़ितों और आत्मसमर्पितों को मिला संबल

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि प्रभावित वर्गों का पुनर्वास है। आंकड़ों के अनुसार:

कुल 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 7,271 नए कार्ड हाल ही में बनाए गए।

मुख्यधारा में लौटने वाले 966 पूर्व नक्सलियों, 178 घायल पीड़ितों और 477 नक्सल पीड़ित परिवारों को मनरेगा से जोड़कर उन्हें स्थायी आजीविका प्रदान की गई है।

आजीविका डबरी: जल संचयन से आर्थिक मजबूती

भैरमगढ़ जैसे क्षेत्रों में, जहाँ कभी दहशत का माहौल था, अब ‘आजीविका डबरी’ निर्माण से ग्रामीण आत्मनिर्भर बन रहे हैं। बेलनार जैसे गांवों में ग्रामीण वापस लौट रहे हैं और मत्स्य पालन व सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। अब तक क्षेत्र में 372 ऐसी डबरियों को स्वीकृति दी जा चुकी है।

पक्के आवास और बुनियादी ढांचे का निर्माण

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 2,977 परिवारों को पक्के मकानों की स्वीकृति मिली है, जिनमें से लगभग 690 घर बनकर तैयार हैं। इसके अलावा:

दुगाली गांव: कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मनरेगा के तहत बना कुआं अब 100 से अधिक ग्रामीणों की प्यास बुझा रहा है।

पालनार और कावड़गांव: यहाँ पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान जैसे निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। 50 साल बाद कावड़गांव में सड़क, बिजली और मोबाइल टावर जैसी सुविधाएं पहुँची हैं।

राशन की सुविधा: बांगोली जैसे सुदूर गांवों में, जहाँ लोगों को 18 किलोमीटर पैदल चलकर राशन लाना पड़ता था, अब गांव में ही उचित मूल्य की दुकानें खुल गई हैं।

युवाओं के लिए कौशल विकास

आत्मसमर्पित नक्सलियों और स्थानीय युवाओं को राजमिस्त्री जैसे तकनीकी कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे वे निर्माण कार्यों में सीधे तौर पर जुड़कर न केवल रोजगार पा रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के पुनर्निर्माण में अपना योगदान भी दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री का संदेश: “शांति और समृद्धि की नई राह”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस परिवर्तन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जब विकास की किरणें समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचती हैं, तभी वास्तविक शांति स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बस्तर के लोगों के जीवन में सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने का एक ठोस माध्यम है।

निष्कर्ष: बीजापुर के इन अंदरूनी इलाकों में रोजगार और शासन के प्रति बढ़ता भरोसा इस बात का प्रतीक है कि संवेदनशील नीतियों के जरिए चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button