छत्तीसगढ़ विधानसभा: ऐतिहासिक शीतकालीन सत्र का समापन, ‘विजन-2047’ और विकास पर केंद्रित रही कार्यवाही

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का हालिया शीतकालीन सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। 17 दिसंबर को संपन्न हुए इस सत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसकी कार्यवाही दो अलग-अलग विधानसभा भवनों में संचालित की गई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सत्र के समापन पर इस उपलब्धि को प्रदेश के संसदीय इतिहास का एक यादगार पल बताया।
सत्र की मुख्य विशेषताएं और उपलब्धियां
इस पांच दिवसीय सत्र के दौरान शासन और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई:
दो भवनों का संगम: सत्र का आगाज़ पुराने विधानसभा भवन से हुआ, जबकि दूसरे दिन से कार्यवाही नए विधानसभा भवन में स्थानांतरित कर दी गई। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला अवसर था।
विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप: सदन में ‘विजन 2047’ पर विशेष चर्चा की गई। इसमें राज्य के आगामी 25 वर्षों के भविष्य, विकास की संभावनाओं और आर्थिक रणनीति पर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने विचार साझा किए।
बजटीय प्रावधान: सत्र के दौरान राज्य सरकार ने अनुपूरक बजट पेश किया, जिसे चर्चा के बाद पारित कर दिया गया।
सांस्कृतिक गौरव: ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सदन ने इस राष्ट्रीय गीत के महत्व पर विशेष चर्चा की।
विधायी कामकाज के आंकड़े
कुल 35 घंटे और 33 मिनट तक चली सदन की कार्यवाही में भारी हंगामे के बीच भी व्यापक विधायी कार्य संपन्न हुए:
विवरण,संख्या
कुल बैठकें, 05
प्राप्त प्रश्न (तारांकित एवं अतारांकित),628
ध्यानाकर्षण सूचनाएं,232 (70 स्वीकृत)
प्रस्तुत याचिकाएं,196 (36 स्वीकृत)
स्थगन सूचनाएं,101
निष्कर्ष: अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के अनुसार, सीमित समय के बावजूद सदन ने जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस की। जहाँ एक ओर विपक्ष ने विभिन्न विषयों पर सरकार को घेरा, वहीं दूसरी ओर सरकार ने महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और भविष्य की योजनाओं को सदन के पटल पर रखा।
















