छत्तीसगढ़ विधानसभा : जल जीवन मिशन की सुस्त रफ्तार पर गरमाया सदन, मंत्री ने दिए जांच के आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मौजूदा सत्र में आज जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा। सदन में यह मुद्दा तब उठा जब विपक्षी सदस्यों ने राज्य के कई क्षेत्रों में पाइपलाइन और नल जल योजनाओं के अधूरे पड़े कार्यों पर सवाल उठाए।
विधानसभा में चर्चा के मुख्य बिंदु
विपक्ष का मुख्य आरोप है कि कागजों पर काम पूरा होने के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सदन में हुई चर्चा के प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं:
अधूरा बुनियादी ढांचा: विपक्ष ने शिकायत की कि कई गांवों में पाइपलाइन टूटी हुई है, पानी की टंकियों से रिसाव (लीकेज) हो रहा है और कई जगहों पर तो नलों में टोंटियां तक नहीं लगी हैं।
भुगतान में देरी: चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि कई ठेकेदारों का भुगतान अटका हुआ है। विपक्ष के अनुसार, 85% काम पूरा होने के बाद भी पैसे न मिलने के कारण ठेकेदारों ने आगे का काम रोक दिया है।
बालोद का मामला: विधायक संगीता सिन्हा ने बालोद विधानसभा क्षेत्र का डेटा प्रस्तुत करते हुए बताया कि वहां स्वीकृत 214 योजनाओं में से अब तक केवल 102 ही पूर्ण हो पाई हैं।
सरकार का पक्ष और आश्वासन
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव ने इन आरोपों पर सरकार का पक्ष रखते हुए स्थिति स्पष्ट की:
समय सीमा में विस्तार: मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने मिशन की समय सीमा को बढ़ाकर अब 2028 कर दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस अवधि के भीतर सभी घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचा दिया जाएगा।
दोषियों पर कार्रवाई: गुणवत्ताहीन कार्यों की शिकायतों पर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जहां भी भ्रष्टाचार या लापरवाही की शिकायत मिलेगी, वहां जांच कराई जाएगी। उन्होंने विपक्ष से विशिष्ट जानकारी मांगी ताकि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा सके।
मरम्मत कार्य: जिन गांवों में तकनीकी खराबी के कारण जलापूर्ति बाधित है, वहां सुधार कार्य प्रक्रिया में होने की बात कही गई है।
निष्कर्ष: सदन में मचे हंगामे के बाद सरकार अब रक्षात्मक मुद्रा में है और विभाग को मिशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
















