छत्तीसगढ़ विधानसभा : बजट सत्र के दौरान सदन में भारी शोर-शराबा, विपक्ष ने किया बहिर्गमन

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में हंगामे का दौर जारी है। शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मुख्य रूप से सड़कों के निर्माण और बजट आवंटन के बाद वित्तीय मंजूरी न मिलने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सदस्यों ने सदन से दो बार वॉकआउट किया।
विकास कार्यों की स्वीकृति पर सवाल
संजारी-बालोद क्षेत्र की विधायक संगीता सिन्हा ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023 से 2026 तक) के बजट में शामिल परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर सरकार को घेरा। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी कि 3 फरवरी 2026 तक किन परियोजनाओं को वित्तीय हरी झंडी मिली है और कितने प्रस्ताव अभी भी वित्त विभाग की फाइलों में दबे हुए हैं।
सरकार का पक्ष और नियमों में बदलाव
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
अधिकारों में वृद्धि: पहले विभागों को केवल 3 करोड़ रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार था, जिसे मई 2025 के नए निर्देशों के तहत बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
लंबित कार्य: मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान रिकॉर्ड के अनुसार संजारी-बालोद क्षेत्र का कोई भी प्रस्ताव वित्त विभाग के पास लंबित नहीं है।
सदन में तकरार और नारेबाजी
वित्त मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों में विकास कार्यों को जानबूझकर रोक रही है। इस मुद्दे पर चर्चा गरमा गई और विपक्ष ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद उन्होंने सदन का परित्याग (वॉकआउट) कर दिया।
मंत्रियों का प्रदर्शन और विधानसभा की कार्यवाही
प्रश्नकाल के दौरान कृषि विभाग से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने एक के बाद एक कई सवालों के जवाब दिए। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि मंत्री जी पर आज सवालों की बौछार हो रही है। इस पर सभापति ने मंत्री के अनुभव और वरिष्ठता की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे पूरी कुशलता से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
बार-बार के वॉकआउट और सरकार विरोधी नारों के कारण सदन की कार्यवाही में काफी व्यवधान देखने को मिला।
















