छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री के विभागों के लिए ₹10,617 करोड़ से अधिक का बजट पारित

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अधीन आने वाले विभिन्न विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 10,617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रुपये की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गई हैं। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष के बजट की मूल अवधारणा ‘संकल्प’ पर आधारित है, जिसका लक्ष्य राज्य को सर्वांगीण विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
प्रमुख विभागों के लिए आवंटित बजट एक नजर में:
विधानसभा में पारित मांगों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों के लिए राशि का आवंटन इस प्रकार है:
विभाग,आवंटित राशि (करोड़ में)
ऊर्जा विभाग,”₹4,236.01″
जल संसाधन विभाग,”₹3,105.11″
खनिज साधन विभाग,”₹1,145.89″
सामान्य प्रशासन विभाग,₹612.29
जनसम्पर्क विभाग,₹469.99
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी,₹416.99
विमानन विभाग,₹314.99
सुशासन और डिजिटल क्रांति पर जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से व्यवस्था के लीकेज को बंद किया गया है, जिससे सरकारी राजस्व में भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने उदाहरण दिया कि आबकारी राजस्व जो पहले लगभग 5,110 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 11,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
तकनीक और एआई (AI) मिशन:
आज के युग को सूचना प्रौद्योगिकी का युग बताते हुए मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री एआई मिशन’ के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों में एआई डेटा लैब्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे। साथ ही, ‘भारत नेट’ परियोजना के जरिए ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है।
ऊर्जा और सिंचाई: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
छत्तीसगढ़ को देश का प्रमुख ऊर्जा केंद्र बनाने के संकल्प के साथ, सरकार ने थर्मल पावर और सौर ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया है।
बिजली सब्सिडी: कृषि पंपों के लिए ₹5,500 करोड़ और घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक राहत देने के लिए ₹800 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
सिंचाई विस्तार: ‘अटल सिंचाई योजना’ और नई परियोजनाओं के माध्यम से 1.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है। बस्तर की इंद्रावती नदी पर नए बैराज और नहरों का निर्माण भी प्रस्तावित है।
नक्सलवाद का अंत और बस्तर का विकास
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 158 गांवों में शत-प्रतिशत बिजली पहुंचाई जा चुकी है। बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि लोग अब हिंसा छोड़कर संविधान की मुख्यधारा में विश्वास कर रहे हैं।
पर्यावरण और खनिज संपदा
राज्य के खनिज राजस्व में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब ₹14,592 करोड़ तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन हमारी प्राथमिकता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत प्रदेश में करोड़ों पौधे लगाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप वन आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है।
विमानन और सांस्कृतिक प्रगति
छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर हवाई अड्डों का विस्तार किया जा रहा है। रायपुर में इंटरनेशनल कार्गो टर्मिनल बनाने की योजना है। इसके अतिरिक्त, राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए ‘रायपुर साहित्य उत्सव’ और ‘प्रवासी छत्तीसगढ़िया सम्मेलन’ जैसे आयोजनों पर भी बल दिया गया है।
















