छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में नशे के सौदागरों पर ‘पिट्स एनडीपीएस’ का शिकंजा : 145 आदतन अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री के गंभीर मुद्दे पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सरकार के कड़े रुख को स्पष्ट किया। विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश से चरस, गांजा, अफीम और नशीली दवाओं जैसे जहर को जड़ से मिटाने के लिए शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति

उपमुख्यमंत्री ने सदन को सूचित किया कि राज्य में पहली बार पिट्स एनडीपीएस एक्ट (PITNDPS Act) के तहत व्यापक कार्रवाई की जा रही है। अब केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों के सप्लायरों और उनके सहयोगियों की वित्तीय जांच भी की जा रही है।

संपत्ति कुर्की: वर्ष 2025 में 16 बड़े तस्करों की लगभग 13.30 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति फ्रीज की गई है।

आदतन अपराधियों पर नकेल: जनवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच 145 ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई हुई है, जो बार-बार नशे के अवैध व्यापार में संलिप्त पाए गए।

हालिया उपलब्धियां और जब्ती के आंकड़े

विगत चार महीनों के भीतर पुलिस ने तस्करी के 399 मामले दर्ज कर 679 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा है। इस दौरान भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं:

गांजा: 6,791 किलोग्राम

अन्य: ब्राउन शुगर, अफीम, हेरोइन, कोकीन, एमडीएमए और करीब 98 हजार से अधिक नशीली गोलियां/इंजेक्शन।

नशा सामग्री: रायपुर और दुर्ग में गोगो, स्मोकिंग कोन और रोलिंग पेपर जैसे नशा सहायक उत्पादों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

श्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए बराबर है। 11 फरवरी 2026 को टिकरापारा थाने में एक आरक्षक के पास से हेरोइन मिलने पर उसके खिलाफ भी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

सुरक्षा ढांचा और ‘मानस’ पोर्टल

नशे के खिलाफ युद्ध को तेज करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किए हैं:

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF): 10 जिलों में विशेष टास्क फोर्स के लिए 100 नए पदों की स्वीकृति दी गई है।

टोल फ्री नंबर 1933: अवैध मादक पदार्थों की गुप्त सूचना देने के लिए ‘मानस’ हेल्पलाइन नंबर संचालित है।

रोचक क्षण: सदन में चर्चा के दौरान जब इस हेल्पलाइन की सक्रियता पर सवाल उठा, तो उपमुख्यमंत्री ने तत्काल विधायक सुशांत शुक्ला को कॉल करके इसकी जांच करने को कहा। विधायक ने बाहर जाकर नंबर डायल किया और सदन को पुष्टि की कि हेल्पलाइन पूरी तरह कार्यरत है।

सप्लाई और डिमांड चेन पर प्रहार

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि शासन का लक्ष्य केवल पकड़-धकड़ नहीं, बल्कि नशे की मांग और आपूर्ति के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। उन्होंने विपक्ष के सदस्यों और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस संवेदनशील विषय पर चर्चा के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि ऐसी चर्चाओं से अपराधियों में शासन का भय व्याप्त होगा।

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