छत्तीसगढ़ का ‘अबूझ’ क्षेत्र अब नक्शे पर : आईआईटी-रुड़की करेगा 5,000 वर्ग किमी का डिजिटल सर्वे

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सबसे दुर्गम और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे अबूझमाड़ क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने इस क्षेत्र के सटीक मानचित्रण (Mapping) के लिए आईआईटी-रुड़की (IIT-Roorkee) के साथ एक आधिकारिक समझौता (MoU) किया है।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
अछूता इलाका: लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ का यह हिस्सा घने जंगलों और सुरक्षा कारणों से अब तक आधिकारिक सरकारी मानचित्रों और राजस्व रिकॉर्ड से बाहर रहा है।
समय सीमा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, इस विस्तृत सर्वेक्षण कार्य को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि सरकार इसे जल्द से जल्द निपटाने की कोशिश करेगी।
विकास का आधार: सटीक मानचित्रण होने से इस क्षेत्र में सड़कें, स्कूल, अस्पताल और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं पहुँचाना आसान हो जाएगा।
नक्सलवाद के खात्मे के साथ विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल नक्सलवाद को समाप्त करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि मुक्त कराए गए क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करना असली चुनौती है।
अमित शाह का विजन: सरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च की समय सीमा तक नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए आश्वस्त है।
सुरक्षा शिविरों की भूमिका: सुरक्षा बलों द्वारा स्थापित नए कैंपों के कारण नक्सलियों का दायरा सिमट रहा है। अब इन कैंपों का प्रभाव क्षेत्र 5 किमी से बढ़ाकर 10 किमी किया जा रहा है, जिससे लगभग 400 गांवों में सुरक्षा और शासन की पहुंच बनी है।
बुनियादी ढांचे की कमी: अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में सड़कों का अभाव एक बड़ी बाधा रही है। सर्वेक्षण के बाद यहाँ बुनियादी ढांचे का निर्माण प्राथमिकता पर होगा।
पिछली बाधाएं और वर्तमान रणनीति
मुख्यमंत्री साय ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व में केंद्र के साथ समन्वय की कमी के कारण राज्य में नक्सली गतिविधियां केंद्रित रहीं। वर्तमान सरकार अब केंद्र के साथ मिलकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है, ताकि अबूझमाड़ का “अबूझ” (अनसुलझा) विशेषण हमेशा के लिए समाप्त हो सके।
















