छत्तीसगढ़

बोर्ड परीक्षा फीस में भारी वृद्धि पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा फीस समेत अन्य शुल्कों में की गई भारी बढ़ोतरी ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस निर्णय को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के इस कदम से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

शिक्षा के नाम पर ‘मुनाफाखोरी’ का आरोप

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने सरकार के इस फैसले को ‘शिक्षा विरोधी’ करार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार ‘परीक्षा पर चर्चा’ जैसे आयोजन करती है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार ने परीक्षा शुल्क को लगभग दोगुना कर एससी, एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

कांग्रेस का कहना है कि महंगाई से पहले ही त्रस्त जनता के लिए यह निर्णय किसी बड़े झटके से कम नहीं है। इससे न केवल अभिभावकों की जेब पर असर पड़ेगा, बल्कि छात्रों में भी मानसिक तनाव बढ़ेगा।

फीस वृद्धि के प्रमुख आँकड़े

कांग्रेस ने शुल्क तालिका में हुए बदलावों को साझा करते हुए सरकार से जवाब माँगा है। शुल्कों में हुई वृद्धि कुछ इस प्रकार है:

मद (Items),पुरानी फीस (₹),नई फीस (₹)
नियमित परीक्षा शुल्क,460,800
नामांकन शुल्क,80,200
अतिरिक्त विषय शुल्क,110,250
सम्पूर्ण विषय शुल्क,”1,230″,”1,600″
परीक्षा केंद्र परिवर्तन,240,400
विशेष विलंब शुल्क,”1,540″,”2,000″

“डबल इंजन” अब “ट्रबल इंजन”: कांग्रेस

धनंजय सिंह ठाकुर ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ने राहत देने का वादा किया था, लेकिन अब वह जनता के लिए “ट्रबल इंजन” बन गई है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि:

बिजली बिल हाफ योजना के तहत मिलने वाली 400 यूनिट की छूट को सीमित किया जा रहा है।

जमीन की रजिस्ट्री पर मिलने वाली 30% की राहत खत्म कर दी गई है।

पहले प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था, जबकि अब उनसे वसूली की जा रही है।

आर्थिक बदहाली का दावा

कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति डगमगा गई है। केंद्र से पर्याप्त सहायता न मिलने के कारण सरकार “मोदी की गारंटी” को पूरा करने के लिए भारी कर्ज ले रही है। इसी वित्तीय दबाव की भरपाई अब शिक्षा विभाग और छात्रों के जरिए की जा रही है।

निष्कर्ष: कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए इस बढ़ी हुई फीस को तत्काल वापस लिया जाए।

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