छत्तीसगढ़

भक्त माता राजिम जयंती : मुख्यमंत्री साय ने दी प्रदेशवासियों को सुख-समृद्धि की शुभकामनाएँ

राजिम। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजिम के पवित्र त्रिवेणी संगम पर आयोजित ‘भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव’ में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्री राजीव लोचन और माता राजिम के चरणों में मत्था टेककर प्रदेश की खुशहाली और उन्नति के लिए प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान ‘साहू सृजन पत्रिका’ का विमोचन किया, वहीं साहू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत गजमाला पहनाकर किया।

समाज की एकता से ही राष्ट्र का उत्थान

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माता राजिम और माता कर्मा के दिखाए मार्ग पर चलकर ही मानव समाज का कल्याण संभव है। उन्होंने साहू समाज की सराहना करते हुए कहा: साहू समाज अपनी शिक्षा, संपन्नता और गौरवशाली इतिहास के लिए पहचाना जाता है।

दानवीर भामाशाह और बाबा सत्यनारायण जैसे महापुरुषों का आशीर्वाद इस समाज को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

जब कोई समाज संगठित होकर कार्य करता है, तभी राज्य और देश सशक्त बनते हैं।

मुख्यमंत्री ने साहू समाज द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया।

नक्सलवाद का अंत और विकास का संकल्प

सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और अब विकास की राह में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सुरक्षा बल नक्सलवाद के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ रहे हैं और सरकार ने 31 मार्च तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने का दृढ़ संकल्प लिया है।

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव

मुख्यमंत्री ने सिरकट्टी आश्रम में भव्य राम-जानकी मंदिर में धर्म ध्वजा स्थापना का उल्लेख करते हुए इसे अयोध्या धाम की परंपरा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि कुटेना में धर्म ध्वजा की स्थापना होना क्षेत्र की धार्मिक चेतना का प्रतीक है।

प्रमुख हस्तियों के विचार

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव: उन्होंने राजिम की पावन धरा को प्रेरणा का स्रोत बताते हुए समाज के संगठित विकास पर जोर दिया।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू: उन्होंने कहा कि राजिम त्याग और तपस्या की भूमि है। भगवान को खिचड़ी खिलाने वाले समाज का हिस्सा होना गर्व की बात है। उन्होंने युवाओं के लिए शिक्षा और संस्कारों को अनिवार्य बताया।

इस गरिमामय आयोजन में साहू समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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