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डिजिटल इंडिया की नई उड़ान : दिसंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दिसंबर 2025 का महीना एक नई उपलब्धि लेकर आया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले लेन-देन में सालाना आधार पर 29% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।

प्रमुख आंकड़े और उपलब्धियां

कुल ट्रांजैक्शन: दिसंबर के दौरान देश में कुल 21.63 अरब यूपीआई सौदे हुए।

कुल मूल्य: इन ट्रांजैक्शंस की कुल राशि ₹27.97 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% अधिक है।

दैनिक औसत: दिसंबर में हर दिन औसतन ₹90,217 करोड़ का लेन-देन हुआ, जो नवंबर के औसत (₹87,721 करोड़) से काफी बेहतर है।

छोटे भुगतानों में बढ़ी यूपीआई की पैठ

रिपोर्ट के अनुसार, अब लोग बड़े निवेश के बजाय रोजमर्रा की छोटी जरूरतों के लिए यूपीआई पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। औसतन प्रति ट्रांजैक्शन की राशि ₹1,363 से घटकर ₹1,262 रह गई है। यह इस बात का संकेत है कि चाय-नाश्ते, स्थानीय सफर और किराना जैसी छोटी खरीदारी के लिए डिजिटल पेमेंट अब पहली पसंद बन गया है।

आईएमपीएस (IMPS) में भी बढ़त: यूपीआई के साथ-साथ तत्काल मनी ट्रांसफर सिस्टम (IMPS) में भी तेजी देखी गई। दिसंबर में इसके जरिए ₹6.62 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा है।

पी2एम (P2M) ट्रांजैक्शन का दबदबा

वर्तमान में भारत में सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या बढ़कर 70.9 करोड़ हो गई है। खास बात यह है कि अब ‘पर्सन टू मर्चेंट’ (P2M यानी दुकानदार को भुगतान) वाले लेन-देन की संख्या ‘पर्सन टू पर्सन’ (P2P) से कहीं ज्यादा है।

P2M ट्रांजैक्शन: 35% की वृद्धि के साथ 37.46 अरब।

P2P ट्रांजैक्शन: 29% की वृद्धि के साथ 21.65 अरब।

गांवों से लेकर शहरों तक, मेडिकल स्टोर से लेकर रेलवे स्टेशनों तक क्यूआर कोड की उपलब्धता ने भारत को वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान का अगुआ बना दिया है।

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