डिजिटल पेमेंट पर मंडराया खतरा : UPI के 80% लेनदेन पर सिर्फ दो ऐप्स का कब्जा

नई दिल्ली (एजेंसी)। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदल दी है और इसका उपयोग अब हर जगह हो रहा है। लेकिन, फिनटेक उद्योग से एक बड़ा चेतावनी संकेत आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग निकाय इंडिया फिनटेक फाउंडेशन ने भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को एक पत्र लिखकर आगाह किया है कि देश के डिजिटल भुगतान सिस्टम में एकाग्रता जोखिम खतरनाक स्तर पर बढ़ रहा है।
IFF का कहना है कि वर्तमान में भारत में UPI के जरिए होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन में से 80% से अधिक हिस्सा केवल दो प्रमुख थर्ड पार्टी ऐप प्रदाताओं यानी मोबाइल पेमेंट ऐप्स के माध्यम से होता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अगर किसी कारणवश इन दोनों ऐप्स में से किसी एक की सेवाएं बाधित होती हैं, तो पूरे UPI इकोसिस्टम पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
IFF ने 29 अक्टूबर 2025 को भेजे गए अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि UPI इस समय गंभीर एकाग्रता जोखिम का सामना कर रहा है। देश के डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत और लचीला बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिले और अन्य ऐप्स को भी समान अवसर दिए जाएं। यह महत्वपूर्ण पत्र वित्त मंत्रालय और RBI दोनों को भेजा गया है।
राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 में UPI के जरिए ₹24.90 लाख करोड़ मूल्य के लगभग 19.63 अरब (बिलियन) लेनदेन दर्ज किए गए। हालांकि अगस्त 2025 में यह संख्या 20 अरब पार कर गई थी। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में डिजिटल लेनदेन कितनी तेज़ी से बढ़ रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी उजागर करता है कि इन लेनदेनों का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा कंपनियों के हाथों में केंद्रित है।
IFF ने दिया सुझाव:
IFF ने अपने पत्र में सरकार, RBI और NPCI को मिलकर UPI प्रोत्साहन नीति में बदलाव करने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि ऐसा करने से छोटे और नए TPAPs को अधिक प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे UPI बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और एकाधिकार की स्थिति समाप्त होगी।
क्या है एकाग्रता जोखिम?
एकाग्रता जोखिम का तात्पर्य है किसी सिस्टम या नेटवर्क का कुछ ही मुख्य प्लेयर्स पर अत्यधिक निर्भर हो जाना। UPI के परिदृश्य में, यदि केवल दो ऐप्स 80% कारोबार संभाल रहे हैं, तो किसी भी तकनीकी खराबी, बड़े साइबर हमले, या किसी नीतिगत विवाद की स्थिति में, पूरे देश का भुगतान नेटवर्क ठप पड़ सकता है। यह स्थिति न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि आम नागरिकों के लिए भी बहुत हानिकारक हो सकती है।
















