छत्तीसगढ़

‘ड्रोन दीदी’ सीमा : तकनीक और हौसले से बदली ग्रामीण खेती की सूरत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित मस्तूरी ब्लॉक के छोटे से गांव पौंड़ी की रहने वाली सीमा वर्मा, आज महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं। कभी तंगहाली और सीमित साधनों के बीच संघर्ष करने वाली सीमा ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के मेल से न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक मददगार के रूप में उभरी हैं।

‘बिहान’ योजना से मिली तरक्की की राह

सीमा के इस सफर की नींव साल 2014 में पड़ी, जब वे ‘जय मां गायत्री स्व-सहायता समूह’ से जुड़ीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार के नए रास्ते दिखे।

शुरुआती कदम: सबसे पहले उन्होंने पैरा मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा।

तकनीकी बदलाव: सीमा केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं। जब उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की ड्रोन तकनीक की योजना के बारे में पता चला, तो उन्होंने इसमें गहरी रुचि दिखाई।

खेती में ड्रोन का जादू और नई पहचान

कठिन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, शासन के सहयोग से सीमा को एक ड्रोन सेट, जनरेटर और ई-वाहन उपलब्ध कराया गया। अब वे खेतों में हाथ से कीटनाशक छिड़कने की पुरानी और थका देने वाली पद्धति को बदल रही हैं।

ड्रोन तकनीक के फायदे:

समय की बचत: घंटों का काम अब कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है।

सटीक छिड़काव: कीटनाशकों की बर्बादी कम होती है और फसल को बेहतर सुरक्षा मिलती है।

स्वास्थ्य सुरक्षा: किसानों को जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क में नहीं आना पड़ता।

“सीमा की इस उड़ान ने उन्हें गांव में ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से एक नई और सम्मानजनक पहचान दिलाई है। वे आज ड्रोन के माध्यम से न केवल बेहतर कमाई कर रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी तकनीकी रूप से सशक्त होने के लिए प्रेरित कर रही हैं।”

सफलता का संदेश

सीमा वर्मा की कहानी यह साबित करती है कि यदि सही अवसर और उचित मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं आसमान की ऊंचाइयों को छू सकती हैं। ‘बिहान’ जैसी योजनाओं ने उनके सपनों को हकीकत में बदलने के लिए जरूरी पंख दिए हैं।

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