शिक्षा के डिजिटल सशक्तिकरण में छत्तीसगढ़ की ऊंची उड़ान : 50 लाख से अधिक छात्रों की ‘अपार’ आईडी तैयार

रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को धरातल पर उतारते हुए छत्तीसगढ़ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान सुनिश्चित करने वाली ‘अपार’ प्रणाली को लागू करने में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो गया है।
ताजा आंकड़ों (7 जनवरी 2026) के मुताबिक, प्रदेश के कुल 57,045 स्कूलों में पढ़ने वाले 57 लाख से अधिक विद्यार्थियों में से 50.60 लाख (लगभग 88.63%) छात्रों की आईडी सफलतापूर्वक बनाई जा चुकी है।
जिलावार प्रदर्शन: बेमेतरा और राजनांदगांव सबसे आगे
बड़े राज्यों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ का यह प्रतिशत सबसे प्रभावशाली माना जा रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य के विभिन्न जिलों ने इस अभियान में सराहनीय उत्साह दिखाया है:
शीर्ष जिले: बेमेतरा (96.40%) और राजनांदगांव (96.38%) इस सूची में सबसे ऊपर हैं।
बेहतर प्रदर्शन: रायगढ़, रायपुर, दुर्ग, कोरबा, कोरिया और धमतरी जैसे जिलों में 93% से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है।
अन्य क्षेत्र: नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जैसे सुदूर क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के लगभग सभी जिलों ने 80% से अधिक का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।
क्यों खास है ‘अपार’ आईडी?
भारत सरकार के निर्देशानुसार, 31 जनवरी 2026 तक शत-प्रतिशत विद्यार्थियों का पंजीकरण अनिवार्य है। यह आईडी कार्ड विद्यार्थियों के लिए ‘एक राष्ट्र, एक छात्र आईडी’ (One Nation, One Student ID) की तरह काम करता है।
इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
डिजिटल रिकॉर्ड: छात्र की शैक्षणिक उपलब्धियां, खेल प्रमाण-पत्र और अन्य क्रेडिट्स एक ही स्थान पर सुरक्षित रहेंगे।
पारदर्शिता: कागजी दस्तावेजों के गुम होने का डर खत्म होगा और शैक्षणिक सत्रों में निरंतरता बनी रहेगी।
आसान माइग्रेशन: एक राज्य से दूसरे राज्य या एक स्कूल से दूसरे स्कूल में प्रवेश लेते समय दस्तावेजों का सत्यापन डिजिटल और त्वरित होगा।
छत्तीसगढ़ शासन के मार्गदर्शन में शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी शेष बचे विद्यार्थियों का पंजीकरण करने में जुटे हैं, ताकि समय सीमा के भीतर राज्य के हर छात्र को इस राष्ट्रीय डिजिटल पहल का लाभ मिल सके।
















